विधायक श्री महतो ने कहा कि किसी भी धर्म, संप्रदाय, समाज, स्थान के हों मैदान में सब एक होकर अपनी टीम को जीत दिलाने के लिए खेलते हैं. कहा महान संत स्वामी विवेकानंद ने कहा था भारत के युवाओं को खेल में रूचि लेनी चाहिए. इसके पीछे का तर्क भी यही था कि खेल से भारत के युवा एक होंगे और भारत को आजाद करेंगे. खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि एक रास्ता है जो आगे बढ़ने का तरीका सिखाता है. खेल कभी हारने नहीं देता है, अंतिम समय तक प्रयास कराता है. यही प्रेरणा जीवन में भी लेने की जरूरत है. जब हम पूरी तरह से हार मान लेते हैं तो एक और प्रयास करने का भावना लाने की जरूरत है. खेल से जो पहचान मिलती है वह किसी अन्य चीज में नहीं है. लोग बडे़ बडे़ पदाधिकारियों को भूल जायेंगें, लेकिन खेल में मिली पहचान को लोग कभी नहीं भूल पायेंगें. कहा हमें अवसर को पहचानने की जरूरत है तभी सफलता मिलेगी.
खिलाड़ी को गरीबी छू सकती है, बीमारी नहीं
जयराम महतो ने कहा खिलाड़ी गरीब हो सकते हैं, उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है. विषम परिस्थिति में खेलना पड़ सकता है, लेकिन खिलाड़ी कभी बीमार नहीं होते हैं. सेवानिवृत्त होने के बाद अधिकारी को चिकित्सक दौड़ने की सलाह देते हैं. देखने को भी मिलता है कि बडे़-बुर्जुग सुबह-सुबह किसी खेल के माध्यम से मैदान में दौड़ लगाते हैं, ताकि वे जीवन के अंतिम पड़ाव में स्वस्थ रह सकें. उन्होंने युवाओं को दौड़ने व खेल कूद में रूचि लेने की बात कही. कहा इससे करियर बनाने में भी मदद मिलेगी. उन्होने विजेता और उपविजेता टीम के खिलाड़ियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया. अपने संबोधन में जयराम कुमार महतो ने गांडेय विधायक को भी निशाने पर लिया. कहा वे हवा हवाई नेता है. उन्हें क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी नहीं है. कहा वे केवल सीएम बैकअप हैं. जब कभी सीएम जेल के अंदर जायें, तो उन्हें सीएम बनाया जा सके. कहा इससे क्षेत्र का विकास नहीं हो सकता है. वे अपने वादे के अनुरूप अपनी सैलरी का 75 प्रतिशत राशि गरीब बच्चों को पढ़ाई में दान देते हैं. मौके पर मो जैनुल अंसारी, मो सैफ, बसंत वर्मा, प्रवीण वर्मा, बिहार के क्रिकेटर प्रदीप मिश्रा, राॅकी नवल, इकबाल, बसंत कुमार के अलावा अन्य उपस्थित थे.
