स्टीवेंसन मेमोरियल चर्च (सीएनआई) पचंबा समेत अन्य चर्च में खजूर रविवार के अवसर पर मसीही समुदाय की महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने खजूर के नाजुक पत्तों से क्रॉस का निशान बनाकर आराधना की और शोभा यात्रा में शामिल हुए. महेशमुंडा चर्च से भी यात्रा निकली गयी.
खजूर रविवार (Palm Sunday) प्रेम, विनम्रता और आत्मबलिदान का प्रतीक है
मिस्सा बलिदान में फादर मसीहचरण ने बताया कि खजूर रविवार (Palm Sunday) प्रेम, विनम्रता और आत्मबलिदान का प्रतीक है. यह हमें सिखाता है कि सच्चा नेता वह होता है जो सेवा भाव से कार्य करता है, ना कि अभिमान से. कहा कि खजूर रविवार न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह आत्मचिंतन और ईश्वर के प्रति आस्था को और गहरा करने का अवसर भी है. यह हमें याद दिलाता है कि कैसे यीशु मसीह ने अपने अनुयायियों के लिए कठिन रास्ता चुना और अंततः मानवता के लिए बलिदान दिया.
क्या है पाम संडे (Palm Sunday)
यीशु मसीह जब जेरूसलम आये थे, तब लोगों ने उनके स्वागत में सड़क पर वस्त्र बिछा दिए थे और खजूर की डालियां हाथ में लेकर होशाना कहते हुए उनका स्वागत किया था. यह दृश्य मसीह के सम्मान और राजा के रूप में उनके स्वागत को दर्शाता है. इसी कारण इस दिन को खजूर रविवार (Palm Sunday) कहा जाता है और मसीही विश्वासी पाम संडे मनाते हैं.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
