मुख्य अतिथि डॉ महेश सिंह, विशिष्ट अतिथि डॉ सफदर इमाम मौजूद थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के सरपरस्त मोइनुद्दीन शम्सी व मंच संचालन सचिव सरफराज चांद ने किया. मौके पर तसौवर वारसी ने मेरी निगाह में तो है दोनों का इंतखाब, हिंदी भी लाजवाब, है उर्दू लाजवाब, होती नही है शायरी उर्दू के बिन मगर, हिंदी बगैर उर्दू मुकम्मिल नहीं जनाब. सरफराज चांद ने हिंदी दिवस का जश्न मनाना है दोस्तों, नगमा खुशी के सबको सुनाना है दोस्तों, हिंदी अगर है मुल्क की पहचान दोस्तों, उर्दू भी है भारत की मेरी शान दोस्तों, चल एकता का दीप जलाना है, दोस्तों सुनाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया. मोइनुद्दीन शम्सी, मशकूर मैकश, तस्सवुर वारसी, एकरामुल हक वली, सद्दाम हुसैन, अंसार कौनैन आदि ने अपनी कविता, शेरो शायरी व गजलों से सबका मन मोह लिया. संस्था के संस्थापक मुख्तार हुसैनी ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में एकरामुल हक वली, मो मकसूद, मो ज़ुबैर, मो मुख्तार ने सहयोग किया.
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