Giridih News :आमलोगों को लड़ना पड़ता है आग से, 43 किमी दूर से आती हैं दमकल की गाड़ियां

Giridih News :रात हो या दिन, बाजार हो या हाइवे, डुमरी प्रखंड में आग लगने का मतलब सिर्फ हादसा नहीं. इसके साथ ही बेबसी भरा लंबा इंतजार भी शुरू हो जाता है.

37 पंचायतों में रहनेवाली सवा दो लाख से अधिक की आबादी वाला यह प्रखंड आपदा प्रबंधन की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. यहां आग से लड़ने की पहली जिम्मेदारी प्रशासन नहीं, बल्कि खुद आम लोगों के कंधों पर होती है. वजह साफ है, जब तक दमकल की गाड़ी 43 किमी दूर से आती है, तब तक बहुत कुछ राख हो चुका होता है.

आपदा प्रबंधन की बुनियादी सुविधा भी नहीं

कहते हैं आग लगती है तो सिर्फ घर नहीं जलते, उम्मीदें भी राख हो जाती हैं. डुमरी प्रखंड के लिए यह जुमला हकीकत बन चुका है. हाल के एक दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर इस सच्चाई को सामने ला दिया है कि आपदा प्रबंधन की बुनियादी सुविधाओं को लेकर यहां फिक्र नहीं है. डुमरी अनुमंडल तेजी से बदलते भूगोल और बढ़ती आबादी के बीच खड़ा एक ऐसा इलाका है, जहां विकास की रफ्तार तो है, पर सुरक्षा व्यवस्था उस अनुपात में नहीं बढ़ पायी है. ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ कई पंचायतों में शहरीकरण तेजी से पैर पसार रहा है. छोटे-छोटे बाजार अब बड़े व्यावसायिक केंद्र का रूप ले रहे हैं, पर खथरनाक ढंग से आग से बचाव के इंतजाम आज भी पुराने ढर्रे पर टिके हैं. डुमरी की भौगोलिक स्थिति इसे और भी नाजुक बनाती है. यह इलाका प्रमुख रेल मार्ग और व्यस्त सड़कों से जुड़ा है. पास में स्टेशन, बाजार और ट्रांसपोर्ट गतिविधियों का दबाव इस क्षेत्र को लगातार जोखिम की स्थिति में रखता है. ऐसे में आग लगने की छोटी-सी घटना भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है.

::केस स्टडी::

हादसा जो सवाल छोड़ गया

हाल ही में कुलगो क्षेत्र के पास हुई एक भीषण अगलगी ने इलाके को झकझोर कर रख दिया. आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही लपटों ने सब कुछ अपनी चपेट में ले लिया. स्थानीय लोग बाल्टियों से आग बुझाने में जुटे रहे. यहां संसाधनों की कमी साफ नजर आयी. सबसे बड़ी समस्या वही रही, दमकल की देरी. जब तक आग बुझाने वाली गाड़ी पहुंची, तब तक नुकसान हो चुका था. हादसे में जान-माल की भारी क्षति हुई और पीछे रह गया सवाल कि क्या इसके नुकसान को कम किया जा सकता था. ग्रामीणों का कहना था कि यदि डुमरी में ही दमकल की व्यवस्था होती तो आग पर शुरुआती समय में ही काबू पाया जा सकता था. फिलहाल हालात ऐसे हैं कि हर घटना अपने पीछे यही कई सवाल छोड़ जाती है और फिर धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य मान लिया जाता है.

40 किलोमीटर हाइवे, पर सुरक्षा शून्य

डुमरी से बगोदर तक फैला लगभग 30 किलोमीटर का नेशनल हाइवे क्षेत्र एक और बड़ी चिंता का कारण है. इस रास्ते से रोजाना सैकड़ों ट्रक, बसें और अन्य वाहन गुजरते हैं. कई बार ज्वलनशील सामान लेकर चलने वाले वाहन भी इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में यदि कहीं भी आग लगने की घटना होती है तो तत्काल मदद मिलनी लगभग असंभव हो जाती है. हादसे के बाद लोग निजी स्तर पर ही प्रयास करते हैं, पर पेशेवर संसाधनों के अभाव में नुकसान बढ़ता ही चला जाता है.

डुमरी क्षेत्र में अगलगी की घटनाएं नयी नहीं हैं

21 मार्च 2021 को फोम और रेक्सीन की दुकान में आग से लाखों की संपत्ति जल गयी थी.

14 नवंबर 2021 को डुमरी बस स्टैंड के पास बैंक शाखा में आग लगी थी.

31 अक्तूबर 2024 को इसरी में एक दुकान में आग लगने से हजारों का नुकसान हुआ20 दिसंबर 2024 को जिलिमटांड़ में झोपड़ी में आग लगने से मां-बेटे की मौत हो गयी थी12 मार्च 2025 को डुमरी चौक के पास कई गुमटियां जलकर राख हो गयी थीं

15 मई 2025 को कुलगो टोल प्लाजा के पास कंटेनर में आग लगने से भारी नुकसान हुआ16 अप्रैल 2026 को डुमरी थाना क्षेत्र के कुलगो टोल प्लाजा के पास एक तेज रफ्तार ट्रक ने खड़े ट्रकों को टक्कर मार दी, जिससे तीन ट्रकों में भीषण आग लग गयी

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >