दुबई में 15 दिनों से फंसा गिरिडीह का प्रवासी मजदूर, परिजनों ने सरकार से लगायी सुरक्षित वापसी की गुहार

दुबई में टूरिस्ट वीजा खत्म होने के बाद बगोदर के रामेश्वर दास जेल में बंद हैं. परिजन सरकार से उनकी सुरक्षित वतन वापसी की गुहार लगा रहे हैं.

बगोदर/गिरिडीह. रोजगार की तलाश में विदेश गये गिरिडीह के एक प्रवासी मजदूर के परिवार की चिंता बढ़ गयी है. बगोदर प्रखंड के अटका पारटांड़ गांव निवासी रामेश्वर दास करीब 15 दिनों से दुबई में फंसा हुआ है. परिजनों के अनुसार, वह मई में टूरिस्ट वीजा पर दुबई गया था. वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद उसकी मुश्किलें बढ़ गयीं और जिस कंपनी में वह काम कर रहा था, वहां से भी उसे हटा दिया गया.

परिजनों का कहना है कि वीजा और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानी के कारण रामेश्वर को दुबई की जेल में रखे जाने की जानकारी मिल रही है. हालांकि, उससे लगातार संपर्क नहीं हो पा रहा है. ऐसे में परिवार उसकी स्थिति को लेकर चिंतित है और उसकी सुरक्षित वतन वापसी के लिए सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है.

बेटे की चिंता में परेशान है पूरा परिवार

रामेश्वर के परिजनों के अनुसार, विदेश कमाने गये बेटे के बारे में उन्हें पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है. हर दिन परिवार उसकी सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहा है. एक ओर बेटे से संपर्क नहीं हो पाने की चिंता है, तो दूसरी ओर उसकी स्थिति को लेकर परिवार के लोग परेशान हैं.

परिजनों ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर रामेश्वर की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराने और उसकी जल्द सुरक्षित वापसी की व्यवस्था कराने की मांग की है.

झामुमो नेता ने प्रशासन से की पहल की मांग

मामले की जानकारी मिलने के बाद झामुमो नेता शत्रुघ्न प्रसाद मंडल ने इसे गंभीरता से लिया है. उन्होंने गिरिडीह डीसी रामनिवास यादव और भारतीय दूतावास से संपर्क कर रामेश्वर की सुरक्षित और शीघ्र वतन वापसी के लिए पहल करने का आग्रह किया है.

बताया गया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से भी भारतीय दूतावास को पत्र भेजे जाने की जानकारी दी गयी है. विधायक नागेंद्र महतो और पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह ने भी रामेश्वर के परिजनों से मुलाकात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया है.

विदेश में संकट में फंसते रहे हैं प्रवासी मजदूर

गिरिडीह और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में मजदूर रोजगार की तलाश में देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों का भी रुख करते हैं. समय-समय पर विदेशों में प्रवासी मजदूरों की मौत, दुर्घटना या कानूनी मामलों में फंसने की घटनाएं सामने आती रही हैं.

ऐसे मामलों में परिवार की उम्मीद सरकारी पहल और संबंधित देश में भारतीय मिशन की मदद पर टिक जाती है. रामेश्वर दास का मामला भी प्रवासी मजदूरों के सामने विदेश में कानूनी और वीजा संबंधी परेशानियों की चुनौती को सामने लाता है. परिवार अब सरकार और भारतीय दूतावास से उसके सुरक्षित घर लौटने की उम्मीद कर रहा है.

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By Kumar gourav

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