झारखंड गठन के 25 वर्ष बाद भी महेशमुंडा मुख्य मार्ग से कुंडलहारी भाया कुसुंभा तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है. आदिवासी बहुल कुंडलहारी के ग्रामीण आज भी कच्ची और कीचड़मय सड़क से आवागमन करने को मजबूर हैं. बारिश के दिनों में सड़क की स्थिति और खराब हो जाने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ जाती है. ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से सड़क का निर्माण कर उन्हें आवागमन की समस्या से निजात दिलाने की मांग की है.
मिशन, रेलवे स्टेशन और प्रखंड से जोड़ता है मार्ग
ग्रामीणों के अनुसार, गिरिडीह-जामताड़ा मुख्य मार्ग पर महेशमुंडा स्थित मवि आदिम जाति सेवा मंडल से कुसुंभा होते हुए कुंडलहारी जाने वाली सड़क लंबे समय से जर्जर है. कुसुंभा से कुंडलहारी तक घने जंगल के बीच कच्ची सड़क होने के कारण लोगों को आवाजाही में काफी परेशानी होती है.
यह मार्ग महेशमुंडा मिशन, रेलवे स्टेशन, गांडेय और प्रखंड मुख्यालय को जोड़ता है. इसके बावजूद सड़क की स्थिति में सुधार नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है. उनका कहना है कि पक्की सड़क बनने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और जरूरी सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी.
जमीन का पेंच बना निर्माण में बाधा
जानकारी के अनुसार, सड़क के कुछ हिस्से में रैयती जमीन है, जबकि कुछ हिस्से में वन विभाग की जमीन पड़ती है. ग्रामीणों का मानना है कि जमीन संबंधी इसी समस्या के कारण सड़क निर्माण की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हो सकी है. ग्रामीणों ने विभाग और जनप्रतिनिधियों से मामले का समाधान कर सड़क निर्माण कराने की मांग की है.
सर्वे कर पीएमजीएसवाई के लिए भेजी गयी सूची : जेई
आरईओ के कनीय अभियंता फैयाज अहमद ने बताया कि सड़क का सर्वे कराया गया है. विभागीय स्तर पर स्टीमेट तैयार कर इसे प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सूचीबद्ध कर भेजा गया है. उन्होंने बताया कि सड़क के कुछ हिस्से में वन विभाग की जमीन आती है. सड़क निर्माण की स्वीकृति मिलने के बाद वन विभाग से एनओसी लेने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी.
ग्रामीणों को अब सड़क निर्माण की स्वीकृति और एनओसी की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है, ताकि वर्षों पुरानी आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान हो सके.
