ज्योतिषीय परंपरा में इस एक माह की अवधि में सूर्य को अपेक्षाकृत कमजोर माना जाता है. फलत: विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य करने से परहेज किया जाता है. धर्माचार्यों के अनुसार खरमास के दौरान शुभ कार्यों की बजाय पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना पर विशेष बल दिया जाता है. इस दौरान सूर्य देव की पूजा, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों को फलदायी माना जाता है. कई श्रद्धालु इस समय व्रत, दान-पुण्य तथा धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक साधना करते हैं.
यह समय दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण
इधर, शास्त्री श्रीकांत भारती ने बताया कि खरमास के समाप्त होने के बाद ही विवाह समेत अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है. 14 अप्रैल के बाद सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही शुभ मुहूर्त पुनः प्रारंभ हो जाएंगे. इसके बाद विवाह और अन्य सामाजिक समारोहों की गतिविधियां तेज हो जाएंगी. धार्मिक दृष्टि से यह समय आत्मचिंतन, पूजा-अर्चना और दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर इस दौरान विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है.
