सूत्रों के अनुसार पत्थर तिसरी प्रखंड की बरवाडीह पंचायत के घंघरीकुरा कन्हाई व गावां के जमडार समेत अन्य जंगल क्षेत्र से निकाला जाता है. 10 पहिया वाहनों में भरकर इन पत्थरों को पश्चिम बंगाल के आसनसोल, दुर्गापुर समेत पाउडर मिलों में खपाया जाता है. बताया जाता है कि सादे पत्थर का जिले भर में एक-दो व्यक्तियों के पास ही लाइसेंसी है. उनके माध्यम से तिसरी, गांवा में पत्थर तस्करों को पत्थर मुहैया कराया जाता है.
पश्चिम बंगाल के आसनसोल, दुर्गापुर समेत पाउडर मिलों में होती है सप्लाई
तिसरी व गावां के जंगलों से रात में पत्थर निकाल कर जमुआ-गिरिडीह सड़क से ले जाया जाता है. तस्करों के पास पर्याप्त कागजात होते हैं. बताया जाता है कि कागजात फर्जी रहते हैं, लेकिन इन्हीं कागजातों के सहारे पत्थर आसनसोल, दुर्गापुर, गिरिडीह समेत अन्य जगहों पर खपाया जाता है. इस घोरखधंधे में गांवा-तिसरी और जमुआ के कई सफेदपोश शामिल हैं. इसके कारण तस्करों धड़ल्ले से पत्थर की खनन कर मालामाल हो रहे हैं. वहीं, राज्य सरकार को राजस्व का चूना लगा रहे हैं.
