Giridih News :जिस ट्रांसपोर्टर पर गोदामों तक खाद्यान्न नहीं पहुंचाने के लगे थे आरोप, कार्रवाई के बदले बिना चालान छह साल बाद उसे 1.40 करोड़ का किया भुगतान

Giridih News :जिले में आपूर्ति विभाग की एक और बड़ी अनियमितता सामने आयी है. झारखंड राज्य खाद्य निगम (जेएसएफसी) ने पीडीएस अनाज ढुलाई से जुड़े एक ट्रांसपोर्टर को बिना चालान के ही एक करोड़ 40 लाख 63 हजार 313 रुपये का भुगतान कर दिया.

मुख्य बिंदु

प्रबंध निदेशक के स्तर से किया गया राशि का भुगतान

चालान नहीं मिलने पर एक्सल शीट के आधार पर तैयार हुआ पेमेंट एडवाइज

एजेंसी को पहले जारी किया गया था शोकॉज

नियम के मुताबिक ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई

हैरानी की बात यह है कि ट्रांसपोर्टर अमित सिंह को यह भुगतान उस कार्य के लिए किया गया, जिस पर पहले अनाज हेराफेरी और निर्धारित गोदामों तक खाद्यान्न नहीं पहुंचाने के आरोप लग चुके थे. मामला नवंबर 2018 से मार्च 2019 के बीच की ढुलाई का है, जबकि भुगतान करीब छह साल बाद किया गया. जानकारी के अनुसार, बीते 18 मार्च को भुगतान का ऑर्डर निकला था. ट्रांसपोर्टर अमित सिंह को पहली किस्त के तौर पर 19 मार्च को 38 लाख 11 हजार 38 रुपये का भुगतान किया गया. धनबाद के गोल बिल्डिंग स्थित एसबीआइ शाखा के अमित सिंह के खाते में यह राशि आरटीजीएस के जरिये भेजी गयी. शेष राशि भी बाद में ट्रांसफर कर दी गयी.

गरीबों का अनाज कालाबाजार में बेच दिया : जानकारी के अनुसार, एफसीआइ गोदाम से जेएसएफसी के गोदामों तक जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) का अनाज पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्टिंग का ठेका दिया गया था. एफसीआइ के गोदामों से विभिन्न प्रखंडों में अनाज को पहुंचाया गया, लेकिन इसी दौरान कई ट्रकें एफसीआइ गोदाम से निकल कर जेएसएफसी के गोदामों तक नहीं पहुंचे. बताया जाता है कि अनाज सीधे कालाबाजार में बेच दिया जाता था. दूसरी ओर, जेएसएफसी के गोदामों में अनाज नहीं पहुंचने के कारण डीलरों को निर्धारित मात्रा में अनाज नहीं मिला. फलस्वरूप उस दौरान काफी संख्या में गरीब कार्डधारी अनाज से वंचित हो गये. इस मामले में ट्रांसपोर्टिंग एजेंसी को कई बार चेतावनी दी गयी थी. लेकिन एजेंसी ने अनाज नहीं पहुंचाया. आज स्थिति यह है कि एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय छह साल बाद उसे अनाज ढुलाई का भुगतान कर दिया गया.भुगतान के लिए ट्रांसपोर्टर ने अपनाये तरह-तरह के हथकंडे : ट्रांसपोर्टर अमित सिंह ने राशि के भुगतान के लिए खाद्य आपूर्ति विभाग से पत्राचार किया. विभाग का कहना था कि ढुलाई का चालान जमा करें, तभी भुगतान संभव है. हेराफेरी में पकड़े जाने के भय से ट्रांसपोर्टर ने चालान खोने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया. बताते चलें कि ढुलाई चालान की चार प्रतियां होती हैं. एक प्रति सहायक गोदाम प्रबंधक के पास होती है, तो दूसरी ट्रांसपोर्टर को रिसीव करायी जाती है. तीसरी प्रति जिला कार्यालय में और चौथी प्रति उठाव प्रभारी के पास होती है. इन चारों ने चालान नहीं होने की बात कही. इसे निगम के प्रबंध निदेशक ने घोर अनियमितता माना. हालांकि भुगतान के लिए एक सुनियोजित रास्ता निकाला गया. इस बार जेएसएफसी के जिला प्रबंधक ने अपने लॉगिन आइडी पर डाटा नहीं होने की बात कहकर रांची एनआइसी से डाटा की मांग की. बताया जाता है कि एनआइसी ने भी आहार पोर्टल से डाटा ना देकर एक एक्सल शीट जिला प्रबंधक को व्हाट्सएप एप पर उपलब्ध कराया. इसी एक्सल शीट के जरिये पेमेंट एडवाइज बनाकर एक करोड़ 40 लाख 63 हजार 313 रुपये का भुगतान एजेंसी को कर दिया गया.

माह – ढुलाई की मात्रा (क्विंटल में) – राशि

नवंबर 2018 – 91821.08 – 38,49,533

दिसंबर 2018 – 48972.29 – 18,63,007

जनवरी 2019 – 80978.21 – 33,58,086

फरवरी 2019 – 74486.13 – 31,66,786

मार्च 2019 – 43840.68 – 18,25,903

नोट : राशि लाख रुपये में

शो-कॉज के बाद भी एजेंसी को काली सूची में नहीं डाला

जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-19 में गरीब कार्डधारियों को अनाज मिलने में काफी परेशानी हुई. अनाज की कमी रहने के कारण अधिकांश प्रखंडों में हो-हंगामा होता रहा. बताया जाता है कि जेएसएफसी के गोदामों में अनाज नहीं पहुंचने के कारण डीलरों को भी अनाज उपलब्ध नहीं हो पाता था. ऐसे में लाभुकों को अनाज नहीं मिल पाया. स्थिति के मद्देनजर अवधि विस्तार को लेकर दो-दो माह का पोर्टल खोला भी गया, लेकिन डबल फिंगर लेकर अनाज की हेराफेरी कर ली गयी. उस दौरान ट्रांसपोर्टर को कई बार चेतावनी दी गयी, तो कई बार आवश्यक निर्देश भी दिये गये. मामला इतना गंभीर हो गया कि ट्रांसपोर्टर को काली सूची में डालने के लिए शो-कॉज भी किया गया. अंतत: ट्रांसपोर्टर अमित सिंह बीच में ही काम छोड़कर भाग गया. अमित सिंह को अगस्त 2018 से जुलाई 2020 तक अनाज ढुलाई का टेंडर मिला था. प्रावधान के अनुसार, एजेंसी की जमानत राशि के साथ-साथ गायब अनाज की राशि का भुगतान लेकर उसे काली सूची में डाला जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा ना कर विभाग ने उसे अवैध तरीके से ट्रांसपोर्टिंग का भुगतान भी कर दिया.

तत्कालीन डीएसओ सह जिला प्रबंधक ने कहा

तत्कालीन डीएसओ सह जिला प्रबंधक, जेएसएफसी गुलाम समदानी ने कहा कि ट्रांसपोर्टर को गलत भुगतान नहीं किया गया है. जिला स्तर से भुगतान नहीं होता है. इस मामले में प्रबंध निदेशक से पत्र मिला था, जिसके बाद भुगतान की अनुशंसा की गयी थी और भुगतान प्रबंध निदेशक के स्तर से किया गया.

(राकेश सिन्हा, गिरिडीह)B

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By Pradeep kumar

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