गिरिडीह से समशुल अंसारी की रिपोर्ट
Giridih Palm Sunday: प्रभु यीशु मसीह के यरूशलेम में विजय प्रवेश की स्मृति में मनाए जाने वाले पाम संडे यानी खजूर रविवार के अवसर पर झारखंड के गिरिडीह जिले में मसीही समुदाय ने पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ पर्व मनाया. जिले के विभिन्न इलाकों में खजूर की डालियों के साथ शोभायात्राएं निकाली गईं और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया.
चर्चों से निकली भव्य शोभायात्रा
इस अवसर पर स्टीवेंसन मेमोरियल चर्च उर्फ सीएनआई पचंबा समेत कई चर्चों से भव्य शोभायात्रा निकाली गई. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. श्रद्धालु हाथों में खजूर की डालियां लेकर प्रभु यीशु का जयघोष करते हुए आगे बढ़ रहे थे, जिससे पूरा क्षेत्र “होशाना” के जयकारों से गूंज उठा.
खजूर के पत्तों से बनाया गया क्रॉस
मसीही विश्वासियों ने खजूर के कोमल पत्तों से क्रॉस का निशान बनाकर आराधना की. यह प्रतीक प्रभु यीशु के बलिदान और उनके संदेश को दर्शाता है. श्रद्धालुओं ने इसे अपने साथ रखकर आस्था और समर्पण व्यक्त किया.
महेशमुंडा चर्च में भी हुआ आयोजन
महेशमुंडा स्थित चर्च में भी खजूर की डालियों के साथ शोभायात्रा निकाली गई. यहां आयोजित मिस्सा बलिदान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्तिमय गीतों और प्रार्थनाओं से वातावरण भक्तिमय बना रहा.
खजूर रविवार का धार्मिक महत्व
मिस्सा के दौरान फादर मसीहचरण ने खजूर रविवार के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि यह पर्व प्रेम, विनम्रता और आत्मबलिदान का प्रतीक है. यह न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि आत्मचिंतन और ईश्वर के प्रति आस्था को और मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करता है.
यीशु मसीह के स्वागत की परंपरा
उन्होंने बताया कि जब प्रभु यीशु मसीह यरूशलेम पहुंचे थे, तब लोगों ने उनके स्वागत में सड़क पर वस्त्र बिछाए और खजूर की डालियां लेकर “होशाना” का जयघोष किया. यह दृश्य उनके राजा के रूप में स्वागत और सम्मान को दर्शाता है. इसी परंपरा को आज भी मसीही समुदाय निभाता है.
होली वीक की होती है शुरुआत
फादर ने कहा कि पाम संडे ईस्टर से पहले आने वाला अंतिम रविवार होता है और इसी दिन से पवित्र सप्ताह यानी होली वीक की शुरुआत होती है. यह समय प्रभु यीशु के त्याग और बलिदान को याद करने का होता है.
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आस्था, प्रेम और एकता का संदेश
इस पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया. गिरिडीह में मनाया गया खजूर रविवार श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक जागरूकता का सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया.
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