सांसद का कहना है कि एकीकृत बिहार के दौरान हुए चारा घोटाले से भी बढ़ा यह मामलाहै. सांसद ने कहा है कि दो अक्तूबर 23 को एक अखबार में बिरनी के आंगनबाड़ी के नौनिहालों का 260 मीट्रिक टन अनाज गबन होने की खबर प्रकाशित हुई थी. इसकी जांच को लेकर सांसद प्रतिनिधि गुड्डू यादव ने 16 अक्तूबर 23 को गिरिडीह के उपायुक्त को पत्र लिखकर इसकी जांच व कार्रवाई करने की मांग की गयी थी.
इसके आलोक में जिला प्रबंधक ने पत्रांक 779 दिनांक 19 अक्तूबर 23 को उपायुक्त को जांच रिपोर्ट सौंपी थी. इसमें दोषी पाये जाने के बावजूद ना तो संबंधित अधिकारी और ना ही कर्मी पर प्राथमिकी दर्ज की गयी और ना ही गबन हुए अनाज की रिकवरी की गयी.कार्रवाई के नाम पर दोषी कर्मी को स्थानांतरित कर दिया गया. इससे आपराधिक षड़यंत्र व दोषी कर्मी को संरक्षण देने का मामला बनता है. क्योंकि, दोषियों के विरुद्ध अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है.
तीन सदस्यीय टीम ने की था जांच
बता दें कि अक्तूबर 2023 में बिरनी प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र में नौनिहालों को मिलने वाला 260 मीट्रिक टन चावल के गबन होने का मामला प्रकाश में आया था. इसके बाद आजसू कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. इसके बाद उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने तीन सदस्यीय टीम से जांच करवायी थी. इसमें 2596 क्विंटल चावल गबन होने की पुष्टि जांच अधिकारियों ने की थी.
आरोप सही मिलने के बाद भी दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी. कार्रवाई की जगह पर दोषी प्रभारी एजीएम सह जनसेवक देवचंद्र मंडल व बाल विकास परियोजना कार्यालय के लेखापाल को दूसरी जगह तबादला कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. अब फिर 16 माह के बाद मामले को तूल पकड़ा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
