Giridih News: ओपेनकास्ट परियोजना को चालू कराने को ले संघर्षशील रही गिरिडीह कोलियरी

Giridih News: सीसीएल गिरिडीह कोलियरी अंतर्गत ओपेनकास्ट परियोजना संघर्ष के दौर से गुजर रही है. वर्ष 2025 की समाप्ति के चंद दिन शेष बचे हुए हैं. इस वर्ष ओपेनकास्ट परियोजना को चालू कराने को लेकर संघर्ष चलता रहा, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पाई. हालांकि इंवायरमेंटल क्लीयरेंस और कंसेंट टू एस्टेब्लिश मिलने के बाद आशा की किरण जगी थी कि इस परियोजना में कोयला का उत्पादन शुरू हो जाएगा. लेकिन कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) नहीं मिलने और आउटसोर्सिंग कंपनी को लेकर टेंडर फाइनल नहीं होने के कारण यहां से कोयला का उत्पादन बंद है.

ओपेनकास्ट परियोजना से कोयला का उत्पादन जनवरी 2022 से ठप है. यह सीसीएल प्रबंधन के अलावे यहां के कर्मचारियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. ओसीपी से उत्पादन शुरू करने में वन विभाग के साथ काफी दिनों तक जमीन विवाद का मामला चला. हालांकि काफी मशक्कत के बाद इस मामले का निष्पादन हो पाया. इसके लिए नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार, राज्य सभा सांसद डा. सरफराज अहमद एवं गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन की पहल पर जमीन विवाद का मामला क्लियर हुआ. इसके बाद ओसीपी को इंवायरमेंटल क्लीयरेंस मिला. तत्पश्चात कुछ दिनों के बाद सीटीई प्राप्त हुआ. इसी और सीटीई मिलने के बाद सीटीओ मिलने का इंतजार किया जाने लगा. इस बीच आउटसोर्सिंग कंपनी के टेंडर का मामला निष्पादित करने की कोशिश की गयी. ओसीपी चलाने को लेकर पिछले दिनों कई आउटसोर्सिंग कंपनियों ने ऑनलाइन निविदा में भाग लिया था. लेकिन तकनीकी कारणों से टेंडर कैंसिल हो जाने के कारण मामला अटक गया. इधर, सीटीओ को लेकर भी झारखंड पोलुशन कंट्रोल बोर्ड में दौड़ लगाया जाता रहा. दोनों मामला सुलझ नहीं पाने के कारण ओपेनकास्ट परियोजना से कोयला का उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है.

ओसीपी में 22 लाख टन खनन योग्य कोयला

सीसीएल सूत्रों के मुताबिक ओसीपी में खनन योग्य 22 लाख टन कोयला है. यूं तो गिरिडीह कोलियरी में कोयला चोरी एक बड़ी समस्या बनी हुई है. ओसीपी भी इससे अछूता नहीं है. पुलिस और सीसीएल सुरक्षा विभाग के संयुक्त अभियान के बाद भी कोयला चोरी रूक नहीं रही है. गिरिडीह कोलियरी में प्रतिदिन अवैध रूप से कोयला का खनन कर बाइक व साइकिल से कोयले को टपाया जाता है. कबरीबाद आउटसोर्सिंग स्थल से कोयले की चोरी हो रही है. वहीं अवैध खनन भी जारी है. यूं तो सुरक्षा विभाग द्वारा छापामारी अभियान चलाया जाता है, इसके बावजूद कोयला चोरी निरंतर जारी है.

क्षेत्र की रौनक पर पड़ा है असर

ओसीपी के बंद रहने के कारण क्षेत्र की रौनक पर खासा असर पड़ा है. यहां से लोकल सेल के कई मजदूरों की आजीविका निर्भर है. रोजगार के अभाव में कई मजदूर पलायन कर गये हैं.वहीं कोयला का उत्पादन शुरू नहीं होने के कारण सीसीएल और राज्य सरकार को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है. कोयला व्यवसाय से जुड़े लोग भी प्रभावित हो रहे हैं. इसलिए ओसीपी को जल्द संचालित करने पर बल दिया जा रहा है.

नये साल में ओसीपी के चालू होने की उम्मीद

वर्ष 2026 में ओपेनकास्ट परियोजना के चालू होने की उम्मीद है. इस संबंध में सीसीएल पर्यावरण विभाग के अधिकारी शम्मी कपूर कहते हैं कि ओसीपी को चालू कराने को लेकर प्रबंधन की ओर से तमाम प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने उम्मीद जताया कि नये साल में ओसीपी चालू हो जाएगा. उन्होंने बताया कि ओपेनकास्ट परियोजना आउटसोर्सिंग मोड में चलेगा. आगामी 31 दिसंबर को आउटसोर्सिंग को लेकर टेंडर ओपेन होगा. इसके कुछ दिनों के बाद तमाम प्रक्रिया निष्पादित हो जाएगा. इसी सप्ताह झारखंड पोलुशन कंट्रोल बोर्ड से सीटीओ मिल जाने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि ओसीपी के चालू होने से नये साल में क्षेत्र में खुशहाली आयेगी.

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Author: MAYANK TIWARI

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