3 दशक से आधी आबादी की कुल्हाड़ी की सुरक्षा में 2200 एकड़ में फैला तुकतुको जंगल

Forest Conservation| गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के अडवारा पंचायत के तुकतुको जंगल की सुरक्षा महिलाओं के भरोसे है. महिलाओं की वजह से यह जंगल एक रमनीक स्थल बन चुका है. पंचायत के पुरुषों ने जंगल बचाने की कवायद शुरू की थी. पुरुष कमाने के लिए बाहर चले गये, तो महिलाओं ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया. कुल्हाड़ी के साथ घूमती महिलाओं से बड़े-बड़े लकड़ी माफिया खौफ खाते हैं.

Forest Conservation| बगोदर, कुमार गौरव : गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के अडवारा पंचायत के तुकतुको जंगल की चर्चा वन विभाग शान से करता है. 2200 एकड़ में फैले इस जंगल की सुंदरता किसी भी प्रकृति प्रेमी का मन मोह लेता है. ऐसा बहुत आसानी से नहीं हुआ. बगोदर वन प्रक्षेत्र पर माफियाओं की नजर शुरू से रही है. जीटी रोड के किनारे होने के कारण ट्रांसपोर्टिंग की सुविधा आसान होती है. इसलिए वन माफिया आसानी जंगल काटकर ले जाते हैं. इस वन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे थे. आसपास के कई जंगलों को कटता देख यहां के ग्रामीणों ने इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली. ग्रामीणों ने तुकतुको वन बचाओ समिति का गठन किया.

कुल्हाड़ी के साथ जंगल की निगरानी करती हैं महिलाएं

पंचायत के पुरुष इस समिति से जुड़े और जंगल बचाने की कवायद में लग गये. जल्द ही समस्या सामने आयी. घर की जवाबदेही संभालने के लिए पुरुष सदस्यों को बाहर कमाने जाना पड़ा. अब चिंता थी जंगल बचाने की. इस चिंता को गांव की महिलाओं ने दूर कर दिया. महिलाओं ने टीम बनाकर कुल्हाड़ी के साथ जंगल की निगरानी शुरू की. इसका असर आज दिखता है. जंगल बेहद खूबसूरत दिखने लगा है.

तुकतुको जंगल.

ऐसे काम करती है तुकतुको वन बचाओ समिति

तुकतुको वन बचाओ समिति से जुड़े सदस्यों ने 3 दशक से जंगल की सुरक्षा की कमान संभाल रखी है. जब रोटी के लिए पुरुषों को बाहर जाना पड़ा, तो महिलाओं ने तय किया कि हर घर से एक-दो महिला इस समिति से जुड़ेंगी. दिन और रात दोनों समय पहरेदारी करेंगी. इसके लिए प्रतिदिन 5-5, 10-10 महिलाओं की अलग-अलग टोली बनती है. इन महिलाओं से बड़े-बड़े लकड़ी माफिया खौफ खाते हैं. ये जंगल काटने वालों का प्रतिरोध तो करती ही हैं, जंगल में आग लगाने वालों के लिए भी चामुंडा का रूप धारण कर लेतीं हैं. ये मिलकर जंगल बचाने का अभियान चला रहीं हैं. यही वजह है कि इस जंगल में बेशकीमती पेड़, फलदार वृक्ष और आयुर्वेदिक पौधों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी सुरक्षित हैं.

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रात में भी जंगल में डटी रहती है महिलाओं की टोली

समिति की महिलाएं रात में भी जंगल की सुरक्षा में तैनात रहतीं हैं. रात के अंधेरे में भी जंगल से लकड़ी काटने वाले चोरों को खदेड़ देतीं हैं. पकड़े जाने पर लकड़ी तस्करों को दंड भी यही महिलाएं देतीं हैं. ग्रामीणों की एकजुटता के कारण यह जंगल उजड़ने से बच गया. जंगल की सुरक्षा और इसके संरक्षण पर हर रविवार को समीक्षा बैठक होती है. इसमें जंगल की गतिविधियों पर चर्चा होती है. मोर, नील गाय, हिरण, भेड़िया, सियार, अजगर समेत अन्य पशु-पक्षियों को सुरक्षा देने पर भी चर्चा होती है.

कुल्हाड़ी के साथ जंगल में पहरा देती हैं महिलाएं.

जंगल ही हमारा सब कुछ है. इसलिए हमलोग जंगल की सुरक्षा में लगे रहते हैं. हर दिन हमलोग तय करते हैं कि जंगल में कोई पेड़ नहीं कटे. 3 दशकों से हमलोग इसकी सुरक्षा में लगे हैं.

पार्वती देवी

जंगल में कई तरह के जीव-जंतु हैं. उन्हें बचाना बहुत जरूरी है. जैसे हमलोग अपने घर में सुरक्षित रहते हैं, उसी तरह पेड़-पौधों के बीच उनका घर है. इसलिए लगातार हमलोग उसे भी बचाने में लगे हैं.

गायत्री देवी

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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