यह कार्यक्रम विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग एवं आइयूसीटीइ, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है. शनिवार को चार सत्रों में शिक्षण, शोध और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हुई.
भारतीय ज्ञान परंपरा समृद्ध
प्रथम एवं द्वितीय सत्र के विषय विशेषज्ञ काजी नजरुल विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ सुमित परोई ने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुसंधान एवं सामुदायिक सहभागिता के परिप्रेक्ष्य में प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र और दृष्टिकोण का समग्र विकास करना था. उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति, जिज्ञासा और संवाद ज्ञानार्जन की आधारशिला है. इसके साथ ही डॉ श्री परोई ने विभिन्न एआई टूल्स का व्यावहारिक प्रदर्शन कर शिक्षण और शोध में उनके उपयोग की जानकारी दी, जिसे प्रतिभागियों ने काफी सराहा.इनकी रही सहभागिता
तृतीय सत्र में आइयूसीटीइ, बीएचयू के सहायक प्रोफेसर डॉ राज सिंह ने शिक्षा एवं अनुसंधान में एआई एथिक्स विषय पर विचार रखते हुए कहा कि हर तकनीक के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू होते हैं. उन्होंने एआइ के जिम्मेदार और मानवीय उपयोग पर विशेष जोर दिया. कार्यक्रम का संचालन डॉ बलभद्र सिंह ने तथा धन्यवाद ज्ञापन सुभाष टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज की सहायक प्राध्यापिका मीरा महतो ने किया. इस दौरान गिरिडीह कॉलेज के प्राचार्य डॉ मृगेंद्र नारायण सिंह भी उपस्थित थे.
