वृंदावन धाम के आचार्य चंदन कृष्ण शास्त्री ने राजा प्रताप भानु की कथा सुनायी. उन्होंने लोगों को उपदेश दिया कि जीवन में संत को पहचानना सीखें. यदि समर्थ सदगुरु की शरणागति हो जायें, तो जीवन सफल हो जाये और यदि जीवन में किसी कपटी मुनि का संग हो जाये, तो जीवन को नर्क बना दे. इसलिए संत और असंत को पहचानें. हम कैसे हैं, यह भी हमें सत्संग से ही प्रेरणा मिलती है. इसलिए बाल्यावस्था से यदि हम भक्ति मार्ग को अपनाते हैं, तो हमारा जीवन सत्संगी होता है. कृष्णा बृजेश्वरी ने भगवान की बाल लीला का वर्णन बड़े भाव के साथ किया.
पूर्व सांसद पहुंचे यज्ञ स्थल
यज्ञ में गिरिडीह के पूर्व सांसद रविंद्र कुमार पांडेय अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. यज्ञ के यज्ञाचार्य जितेंद्र कुमार उपाध्याय, मुख्य यजमान दिग्विजय उपाध्याय, यजमान सतीश उपाध्याय, मनोज वर्मा, वीरेंद्र बर्मा, सुरेश यादव सपत्नी विधानपूर्वक पूजन कर रहे हैं. सफल बनाने में संरक्षक दिलीप उपाध्याय, अध्यक्ष विनय सिन्हा, संयोजक भिखारी मास्टर, दीपक पंडित, उदय वर्मा, नरेश यादव, विनोद राणा, राजेंद्र यादव, डॉ उपेंद्र वर्मा, श्रीकांत वर्मा, श्याम प्रजापति, जागेश्वर तुरी, टिंकू वर्मा, सुजीत साव, कृष्णा स्वर्णकार, प्रकाश वर्मा, बीरेंद्र वर्मा, बाली वर्मा, विकास साव, गणेश तुरी, दुर्गा वर्मा, सुवेश यादव, जगदीश वर्मा, सुरेंद्र यादव, पूर्ण महतो, संजय राणा, पंचानंद वर्मा, गिरजा वर्मा आदि सक्रिय हैं.
