दुर्गा पूजा के छठे दिन रविवार को मां दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी की पूजा की गयी. शाम को बेलभरणी की पूजा कर मां दुर्गा का आह्वान किया गया. देर शाम इस पूजा को संपन्न कराया गया. बताया गया कि यह इस पूजा का महत्वपूर्णअनुष्ठान है, जो बिल्वरण पूजा के नाम से ही जाना जाता है. बताया जाता है कि दुर्गोत्सव की आधिकारिक शुरुआत देवी की उपस्थिति का प्रतीक बिल्वरण वृक्ष की पूजा करके ही किया जाता है. ज्ञात हो कि बिलवरण पूजा षष्ठी तिथि की शाम को की जाती है. इनकी पूजा करने से देवी का आशीर्वाद लोगों को मिलता है तथा सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस दौरान पूजा पंडालों में पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल तथा घंटे की आवाज से क्षेत्र गुंजायमान रहा.
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