इसके बाद लघु सिंचाई विभाग के द्वारा स्वीकृत इस तालाब का जीर्णोद्धार कार्य करने से ग्रामीण व रैयतों को होनेवाली समस्या की जानकारी ली और निष्पादन करने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया.
तालाब की मेढ पर बैठकर सुनी किसानों की समस्या
तालाब का निरीक्षण के बाद डीसी ने तालाब की मेढ पर बैठक कर ग्रामीणों की समस्या सुनी. ग्रामीणों ने बताया कि बड़का आहर से करीब 150 मीटर ऊपर एक तालाब पूर्व से है. इससे सिंचाई सहित सभी कार्य के लिए पानी उपलब्ध हो जाता है. बड़का आहर से सौ मीटर नीचे भी एक तालाब बना हुआ है. दोनों तालाब के बीच बड़का आहर है, जहां पर लबनियां, मानिकबाद, भूचरोबाद समेत अन्य गांव लोगों के खेत हैं. इसी तालाब में उपरोक्त गांव के लोगों का छठ व श्मशान घाट है. सिंचाई विभाग ने मिट्टी काट दिया है. इससे बरसात में उपजाऊ जमीन पानी में डूब जाएगी तथा श्मशान व छठ घाट का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा. वहीं, जमुआ प्रखंड के सूरजा गांव स्थित दसौंधी आहर के जीर्णोद्धार कार्य में संवेदक के द्वारा मानक की अनदेखी किये जाने व तालाब में बने घाट को तोड़ ने की शिकायत ग्रामीणों ने की. ग्रामीणों की शिकायत पर डीसी ने दसौंधी आहर का निरीक्षण किया.
मामले की समीक्षा कर लिया जायेगा निर्णय
तालाब के निरीक्षण के उपरांत उपायुक्त ने कहा कि लबनिया गांव के तालाब की स्वीकृति से किसानों के तालाब के नीचे व ऊपर स्थित खेतों के डूबने की संभावना है. हालांकि, लघु सिंचाई विभाग के द्वारा खेत के नहीं डूबने की बात कही जा रही है. मामले की समीक्षा कर इसमें उचित निर्णय लिया जायेगा. सूरजा गांव में स्थित तालाब का भी जायजा लिया. इसमें कार्य अधूरा मिला. बरसात के पूर्व कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया.
इनकी रही उपस्थिति
मौके पर खोरीमहुआ के अनुमंडल पदाधिकारी समीर खलको, देवरी के बीडीओ कुमार बंधु कच्छप, अंचल निरीक्षक पंकज कुमार, अमीन सुमित कुमार, राजस्व कर्मचारी अरविंद किरण, ग्रामीण रामानंद चौधरी, बमशंकर उपाध्याय, लालजीत चौधरी, कुणाल गौतम सागर, बहादुर चौधरी, महेश चौधरी, सुबोध चौधरी, प्रवीण वर्मा, रामचंद्र साहू, शंकर मंडल, नारायण दास, लालजीत दास, दुखन रविदास आदि मौजूद थे.
