बाराडीह पंचायत के बेलाटांड़ तुरियाटोला में एक दलित परिवार जर्जर मिट्टी और खपरैल के मकान में रहने को मजबूर है. मकान की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें पड़ गयी हैं, जबकि छत में लगी लकड़ियां कमजोर होकर झुक गयी हैं. भारी बारिश या किसी भी समय मकान के गिरने की आशंका बनी हुई है. इसके बावजूद चेतलाल तुरी अपने माता-पिता, पत्नी और छह-सात छोटे बच्चों के साथ इसी घर में रहने को विवश हैं.
दरारों से कमजोर हुईं दीवारें, छत भी जर्जर
स्थानीय पंचायत निवासी पिंटू यादव ने बताया कि चेतलाल तुरी का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है. मिट्टी की दीवारों में कई जगह बड़ी-बड़ी दरारें हैं और खपरैल की छत को सहारा देने वाली लकड़ियां भी काफी कमजोर हो चुकी हैं. ऐसे में परिवार के सामने हर समय हादसे का खतरा बना रहता है.
उन्होंने बताया कि परिवार के एक बच्चे के बीमार रहने के कारण आर्थिक परेशानी और बढ़ गयी है. पिंटू यादव के अनुसार, बच्चे को नियमित रूप से खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है, जिससे परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है. उनका कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार बच्चे का बेहतर इलाज कराने में भी सक्षम नहीं है.
आवास योजना की स्वीकृति, भुगतान के अभाव में नहीं शुरू हुआ निर्माण
पिंटू यादव ने आरोप लगाया कि परिवार को अब तक सुरक्षित पक्का आवास नहीं मिल पाया है. उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से परिवार की स्थिति का तत्काल संज्ञान लेकर सुरक्षित आवास और बच्चे के इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की.
इस संबंध में बाराडीह पंचायत के मुखिया सहदेव यादव ने बताया कि चेतलाल तुरी के अबुआ आवास को स्वीकृति मिल चुकी है. पहली बार बैंक खाते में आधार लिंक नहीं होने के कारण भुगतान नहीं हो पाया था. इसके बाद सरकार की ओर से दोबारा राशि नहीं भेजी गयी, जिसके कारण आवास निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका.
बच्चे की बीमारी की जानकारी नहीं मिलने की बात
मुखिया सहदेव यादव ने बताया कि चेतलाल तुरी की पत्नी उनके ही गांव पिपराडीह की रहने वाली हैं. उन्होंने कहा कि बच्चे की बीमारी के संबंध में उन्हें अब तक जानकारी नहीं दी गयी थी. यदि बच्चा बीमार है और नियमित उपचार की जरूरत है, तो उसे सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ दिलाने का पूरा प्रयास किया जायेगा.
बीडीओ ने कहा- जानकारी लेकर दिलायेंगे सुविधा
बिरनी बीडीओ फणीश्वर रजवार ने कहा कि संबंधित मुखिया से परिवार की स्थिति की जानकारी ली जायेगी. इसके बाद परिवार को आवास और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जायेगी. जर्जर मकान में रह रहे परिवार के लिए फिलहाल सुरक्षित आवास की व्यवस्था करना सबसे जरूरी चुनौती बनी हुई है.
