भगला काली मंदिर सरिया के पुजारी बाबूलाल पांडेय ने बताया कि रविवार को शारदीय नवरात्र के छठे दिन मां भगवती के छठे रूप कात्यायनी की विधिवत पूजा की गयी. उन्होंने बताया कि भक्तों ने मां दुर्गा को बिल्व वृक्ष पर उनका आह्वान करके उनकी पूजा आरंभ करने के लिए आमंत्रित करते हैं. नवरात्र के निमित्त यह महत्वपूर्ण अनुष्ठान है जो बेलवरण पूजा के नाम से ही जाना जाता है. मान्यता है कि इस अनुष्ठान से देवी का आशीर्वाद मिलता है.
देवता के आवाहन के निमंत्रण की पवित्र परंपरा
बताया कि वास्तव में दुर्गोत्सव की औपचारिक शुरुआत देवी की उपस्थिति का प्रतीक बिल्ववरण वृक्ष की पूजा करके ही की जाती है. यह देवता के आह्वान की एक पवित्र परंपरा से युक्त निमंत्रण है. बेलवरण पूजा दुर्गोत्सव के लिए माहौल तैयार भी करता है. बेलवरण के दौरान पूजा पंडालों में पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल तथा घंटे की आवाज से क्षेत्र गुंजायमान रहा. देवी के मंत्रों के साथ क्षेत्र गूंजता रहा.
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