शनिवार को बीडीओ मनोज मरांडी और सीओ ऋषिकेश मरांडी दलुवाडीह गांव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. हालांकि ग्रामीणों ने जता दिया है कि अब वे केवल आश्वासन से संतुष्ट होनेवाले नहीं. सड़क निर्माण की मांग को ले आंदोलन की तैयारी में हैं.
जच्चा-बच्चा की स्थिति में सुधार
बताया जाता है कि मधुबन पंचायत अंतर्गत पारसनाथ की तराई में स्थित आदिवासी बहुल गांव दलुवाडीह में बुधवार को एक प्रसूता की तबीयत प्रसव के बाद अचानक बिगड़ गयी थी. करीब चार किलोमीटर लंबी जर्जर सड़क के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी. स्थिति गंभीर होने पर ग्रामीणों ने महिला को खाट पर टांगकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाया. इसके बाद गिरिडीह सदर अस्पताल भेजा गया. इलाजरत महिला और नवजात की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है, पर इस घटना ने इलाके में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को उजागर कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में क्षेत्र के लोगों को वर्षों से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.घटना के तीन दिन बाद गांव पहुंचे अधिकारी
प्रसूता को खाट पर ले जाने की घटना मीडिया और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बनने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की टीम शनिवार को दलुवाडीह पहुंची. बीडीओ मनोज मरांडी और सीओ हृषिकेश मरांडी ने समस्याएं सुनीं तथा सड़क की स्थिति का निरीक्षण किया. अधिकारियों के दौरे के बावजूद ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है.
आधा दर्जन गांवों के लोगों में आक्रोश
सड़क समस्या केवल दलुवाडीह तक सीमित नहीं है. पारसनाथ मौजा के आधा दर्जन गांवों के लोग इस समस्या से प्रभावित हैं. दलुवाडीह, कुरुवाटांड़ समेत आसपास के गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं. आवागमन लगभग ठप हो जाता है. ग्रामीणों का आरोप है कि आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है.आमसभा में बनेगी आंदोलन की रणनीति
सड़क निर्माण को लेकर रविवार को गांव में एक विशाल आमसभा होगी, जिसमें पारसनाथ मौजा के विभिन्न गांवों के ग्रामीण शामिल होंगे. मौके पर आंदोलन की रूपरेखा तय की जायेगी. ग्रामीणों का कहना है कि अब वे चुप बैठने वाले नहीं हैं. सड़क निर्माण की दिशा में शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाये गये तो आंदोलन शुरू किया जायेगा.
