गिरिडीह : आरसीएमएस के सचिव एनपी सिंह बुल्लू ने कहा कि कई लोगों द्वारा विरोधाभाष पैदा किये जाने के कारण गिरिडीह कोलियरी को बंद करने व कामगारों के स्थानांतरण का मामला काफी गरम हो गया है. उन्होंने कहा कि कार्मिक प्रबंधक राजीव कुमार के पत्र से प्रतीत होता है कि यह पत्र उन्होंने अपने किसी ऊपर के पदाधिकारी के स्वीकृति के बिना लिखा है.
बहुत जल्द ही उनको भी अपनी असलियत का पता चलेगा. श्री सिंह ने कहा कि इस बाबत बीएंडके के महाप्रबंधक से फोन पर वार्ता हुई है. जीएम ने बताया कि यह सब गलत है और इसका कोई अस्तित्व नहीं है. गिरिडीह कोलियरी से डिस्पैच तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए हमलोगों से वार्ता करके कोई निर्णय लिया जायेगा. श्री सिंह ने कहा कि अगर प्रबंधन इसके बाद भी कोई एकतरफा निर्णय लेकर मजदूरों को तंग-तबाह करने की नीयत रखता है तो आरसीएमएस इसका डटकर विरोध करेगी. साथ ही यह भी बतायेंगे कि सीसीएल में केवल परियोजना पदाधिकारी और महाप्रबंधक ही नहीं होते बल्कि उसके बाद भी कई जिम्मेवार पदाधिकारी होते हैं. उन्होंने कहा कि इस बाबत जल्द ही सारे पुराने यूनियनों के साथ वार्ता की जायेगी.
श्री सिंह ने कहा कि महाप्रबंधक के अनुसार स्थानीय प्रबंधक को यह नोटिस वापस लेना चाहिए था परंतु ऐसा नहीं हुआ. कहा कि परियोजना, एरिया या हेडक्वार्टर स्तर पर यूनियनों के साथ कोई वार्ता नहीं हुई है. कहा कि पिछले दिनों कबरीबाद खदान में एक दुर्घटना घटित हुई. इस संबंध में उनकी यूनियन से कोई वार्ता नहीं की गयी.
अब कई विवादास्पद कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कबरीबाद खदान में घटित घटना की जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि जेसीबी से अवैध खंतों को भरने की बात कही जाती है. परंतु सीसीएल जेसीबी का पेमेंट नहीं करता है. ऐसे में किसके इशारे पर अवैध खदानों को भरा जा रहा है और कौन इसका भुगतान करता है, यह भी जांच का विषय है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग कोलियरी को घाटे में दिखाकर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं.
सीसीएल गिरिडीह कोलियरी को किसी भी सूरत में बंद होने नहीं दिया जायेगा. कोलियरी को बंद करने संबंधित जो निर्णय लिये जा रहे हैं उसे प्रबंधन को वापस लेना होगा. ये बातें जिला परिषद उपाध्यक्ष कामेश्वर पासवान ने शुक्रवार को जिला परिषद कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित कर कही. उन्होंने कहा कि गिरिडीह कोलियरी को बंद करने में सबसे बड़ा हाथ कोलियरी के यूनियन लीडरों का है.
यूनियन के लोग सांसद और विधायक का पुतला दहन कर यह जताने चाहते हैं कि वही कोलियरी के विरोधी हैं. कोलियरी को बंद कराने की साजिश में भाजपा विरोधी दलों का ही हाथ है. कोलियरी प्रबंधन के अनुसार कोलियरी को 113 करोड़ का सलाना नुकसान हो रहा है. इसकी भरपायी के लिए सीसीएल प्रबंधन ने एमपीएल को कोयला उठाव का आदेश दिया. उसके पास कोयला जाता तो सलाना करीब 50-55 करोड़ की भरपायी होती, लेकिन यूनियन के लोगों ने मिलकर उसे रुकवा दिया. अब यहां जब कोलियरी बंद होने की स्थिति आ रही है तो यूनियन के लोग सांसद व विधायक का पुतला दहन कर रहे हैं. यूपीए के शासन काल में सीसीएल क्षेत्र के लोगों का जाति, आवासीय आदि प्रमाण पत्र नहीं बन रहा था. आवास योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा था, लेकिन भाजपा के कार्यकाल में इसका लाभ मिल रहा है. जिप सदस्य प्रमिला मेहरा ने कहा कि सीसीएल क्षेत्र में 60 से 70 हजार की आबादी निवास कर रही है.
यह आबादी पूरी तरह से सीसीएल पर ही निर्भर है. इसके बंद होने पर उन्हें परेशानी होगी. प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष संजीत कुमार सिंह पप्पू ने कहा कि अंगरेजों के जमाने से यहां कोलियरी चल रही है. यहां की कोयले की मांग हमेशा रही है. गिरिडीह कोलियरी को बंद करने से रोकने के लिए सांसद और विधायक भी लगे हैं. गिरिडीह में अबरख की फैक्ट्ररियां बंद हो चुकी है. लोग बेरोजगार हो गये हैं. अब कोलियरी भी बंद होगी तो लोग कहां जायेंगे.
