आदर्श डोभा. पायलट प्रोजेक्ट के तहत गिरिडीह में आदर्श डोभा का निर्माण
उपयुक्त परिस्थिति व संसाधन का संयोग विकास को संभव और सुगम करता है. झारखंड में ग्रामीण विकास के लिए ‘आदर्श डोभा’ के पायलट प्रोजेक्ट की अवधारणा इसी पर आधारित है. राज्य में गिरिडीह से शुरू प्रोजेक्ट के लिए सिंचाई की जरूरत वाले क्षेत्रों का चुनाव इस प्रकार किया गया है कि वहां के लोगों में मछली पालन, मुर्गी पालन तथा बतख पालन को लेकर दिलचस्पी हो.
गिरिडीह : जल संवर्द्धन के लिए राज्य सरकार की ओर से शुरू डोभा निर्माण योजना को धरातल पर उतारते हुए जिला प्रशासन ने गिरिडीह में एक पहल की है. राज्य के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मनरेगा के तहत शुरू इस योजना में कन्वर्जेंस के तहत एक साथ तीन-तीन स्कीम शुरू की गयी है. स्कीम के तहत डोभा में मछली पालन के साथ-साथ उसके एक कोने पर बतख पालन और दूसरे कोने में मुर्गी पालन होगा. योजना सफल होने पर राज्य भर में इसे लागू किया जायेगा.
रोजगारोन्मुख करना योजना का मकसद : योजना का मकसद है कि इससे एक परिवार का बेहतर तरीके से गुजर-बसर हो जाये. नमूना के तौर जिला के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में इस योजना को लिया गया है. योजना सफल हो गयी तो अगले वित्तीय वर्ष में जिला भर में इसे धरातल पर उतारा जायेगा. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी बसंत कुमार ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने और संसाधन विकसित करने के साथ-साथ लाभुक को रोजगार से जोड़ना है.
लाभुकों को मिलेगा रोजगार
कार्यक्रम पदाधिकारी बसंत कुमार ने कहाकि प्रथम चरण में जिला भर में प्रत्येक प्रखंड में 10-10 डोभा बनाए जायेंगे. जिला के सभी 13 प्रखंडों में 150 डोभा बनाने का लक्ष्य तय हुआ है. इस योजना से एक डोभा की लागत चार लाख 80 हज़ार रु के आसपास होगी. कहा कि यह योजना एक परिवार के लिए जीविकोपार्जन का एक बेतहर जरिया होगा.
जिला में बनेंगे 17500 सामान्य डोभा
कार्यक्रम पदाधिकारी श्री कुमार के अनुसार गिरिडीह जिला में कुल 17500 सामान्य डोभा बनाये जायेंगे. इनमें करीब 5000 डोभों का निर्माण पूर्ण हो चुका है. 9500 डोभा निर्माणाधीन हैं. एक सामान्य डोभा की लागत 60 से 70 हजार रु आती है, लेकिन आदर्श डोभा निर्माण में चार लाख 80 हजार रु की लागत आयेगी.
मुर्गी-बतख का मल होगा मछली का चारा
डीडीसी किरण कुमारी पासी ने कहा कि आदर्श डोभा से एक तरफ जहां सिंचाई होगी, वहीं दूसरी तरफ इसमें मछली पालन भी होगा. खास कर योजना जिन आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शुरू की गयी है, वहां लोग बतख पालने में ज्यादा रुचि रखते हैं. मुर्गी पालन उनका मूल पेशा है. ऐसे में आदर्श डोभा के ऊपरी हिस्से में एक कोने में बतख पालन होगा और दूसरे कोने मुर्गी पालन होगा. डोभा के ऊपरी हिस्से में निर्मित मुर्गी और बतख पालन शेड की मुर्गी और बतख के मल डोभा की मछली का चारा होगा. इससे मछलियां तेजी से बढ़ेंगी. मनरेगा से डोभा और शेड बनाये जा रहे हैं तो पशुपालन विभाग से लाभुकों को मुर्गी और बतख पालन का प्रशिक्षण दिया जायेगा. मुर्गियों के चूजे और बतख दोनों जिला प्रशासन उपलब्ध करायेगा. इसके लिए पशुपालन विभाग को इस योजना से जोड़ा गया है.
गिरिडीह में कुल 40 योजनाएं
आदर्श डोभा के नाम से प्रसिद्ध इस योजना से गिरिडीह जिला में कुल 40 योजनाएं ली गयी हैं. इसकी लागत लगभग 4.8 लाख रु होगी. आदर्श डोभा की लंबाई 50 फीट और चौड़ाई 50 फीट होगी. डोभा बनने के बाद उसके ऊपर एक कोने में 40 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा एक मुर्गी पालन शेड बनाया जायेगा और दूसरे कोने में 20 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा एक डक शेड का निर्माण किया जायेगा.
