गिरिडीह : चैताडीह स्थित मातृत्व व शिशु कल्याण केंद्र (सरकारी अस्पताल) से गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट नर्सिंग होम ले जाये जाने का खेल चल रहा है. कुछ सहियाओं की इसमें मिलीभगत है. नर्सिंग होम संचालक एक मरीज के बदले तीन हजार रुपये तक कमीशन देते हैं. निजी अस्पतालों ने बकायदा एजेंट भी नियुक्त कर रखे हैं. इन एजेंटों का काम नर्सिंग होम तक गर्भवती महिलाओं को पहुंचा देना है. बता दें कि चैताडीह स्थित केंद्र में अल्ट्रासाउंड सेंटर भी है.
चैताडीह सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल ले जायी जा रहीं गर्भवती
गिरिडीह : चैताडीह स्थित मातृत्व व शिशु कल्याण केंद्र (सरकारी अस्पताल) से गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट नर्सिंग होम ले जाये जाने का खेल चल रहा है. कुछ सहियाओं की इसमें मिलीभगत है. नर्सिंग होम संचालक एक मरीज के बदले तीन हजार रुपये तक कमीशन देते हैं. निजी अस्पतालों ने बकायदा एजेंट भी नियुक्त कर रखे […]

अस्पताल के वार्ड से यहां अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंचनेवाली गर्भवती महिलाओं को सहिया और एजेंट निजी अस्पताल ले जाने के लिए बरगलाते हैं. मामले की जानकारी विभाग के आला अधिकारियों को मिलने के बाद सदर अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ उपेंद्र कुमार दास ने शनिवार को चैताडीह पहुंचकर जांच की और मामले की पुष्टि भी की.
अल्ट्रासाउंड की पर्ची कटाने के बाद गायब हो जाती है गर्भवती : गुरुवार की सुबह 10.30 बजे जमुआ प्रखंड स्थित बलयडीह की 28 वर्षीय गर्भवती शबाना खातून(पति कलीम अंसारी) चैताडीह में प्रसव के लिए आयी. काउंटर पर निबंधन की पर्ची (संख्या 1098) कटायी. ड्यूटी पर तैनात डॉ सुनीला ने शबाना का चेकअप किया और कोई प्रगति होती न देख महिला को आसपास घूमने की सलाह दी. बावजूद कोई प्रोग्रेस नहीं हुआ तो डॉ सुनीला ने शबाना को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी. शबाना के पति कलीम ने अल्ट्रासाउंड में रसीद कटा ली. मुख्यमंत्री जननी सुरक्षा योजना के तहत शबाना का अल्ट्रासाउंड मुफ्त में किया जाता, लेकिन अल्ट्रासाउंड केंद्र से निकली शबाना दोबारा चैताडीह स्थित अस्पताल नहीं पहुंची. पता चला कि अल्ट्रासाउंड सेंटर के पास ही निजी अस्पतालों के एजेंट और सहिया सक्रिय रहते हैं जो महिलाओं को बरगलाकर नर्सिंग होम ले जाते हैं.
एसएनसीयू वार्ड का किया निरीक्षण : अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ दास ने चैताडीह स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण के दौरान शनिवार को एसएनसीयू वार्ड का भी निरीक्षण किया. डाॅ दास ने वार्ड में डयूटी पर तैनात डाॅ जीतेंद्र कुमार को कई निर्देश दिया. बता दें कि वार्ड में नौ नवजात भर्ती थे. निरीक्षण के बाद डॉ दास ने कहा कि चैताडीह में बेहतर सुविधा दी जा रही है. कहा कि बेबी बोर्न यूनिट में जैसी सुविधा दी जा रही है, वैसी सुविधा के लिए बाहर में लाख दो लाख रुपये खर्च हो जाते हैं.