धनबाद : संवेदक संघ की बैठक रविवार को गांधी सेवा सदन में हुई. नगर निगम के सहायक अभियंता मनोज कुमार, जिसे कुछ दिन पहले एसीबी ने रिश्वत लेते पकड़ा था, पर लगे आरोप को निराधार बताया.
संवेदक संघ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि विगत दस वर्षों में नगर निगम के किसी पदाधिकारी एवं कर्मचारी ने आज तक किसी कार्य के लिए परेशान नहीं किया. किस परिप्रेक्ष्य में सहायक अभियंता मनोज कुमार को रिश्वत देने की बात उभर कर आयी, यह हम सभी के गले नहीं उतर रहा है.
निगम के सभी कार्य गुणवत्ता पूर्वक किया जाता है, जिसमें पदाधिकारियों का सर्वोच्च योगदान रहता है. महापौर, उप महापौर, नगर आयुक्त तथा पार्षदों के अथक प्रयास से धनबाद का विकास चरण पर है. इनके द्वारा ईमानदारी पूर्वक किये जा रहे प्रयास का हम सभी सराहना करते हैं. महापौर, उप महापौर व नगर आयुक्त से मंगलवार को मिलकर संवेदकों की समस्या से अवगत कराया जायेगा.
बैठक में संवेदक विजय सिंह, दिवाकर सिंह, रमेश कुमार रवानी, पंकज तिवारी, सुजीत सिंह, सुभाष शर्मा, कुंदन सेन, अशोक यादव, अजीम खान, प्रहलाद यादव, बंटी अंसारी, चंद्रशेखर यादव, सोनू, लल्लू यादव, संजय सिंह, विक्की गोप, विक्की सिंह, मुक्कू सिंह, जय मंगल सिंह, रंजीत यादव सहित एक सौ से अधिक संवेदक उपस्थित थे.
एनआइटी 85 बना संवेदकों के लिए गले का फांस
संवेदकों के लिए एनआइटी 85 गले का फांस बनता जा रहा है. एनआइटी 85 में 103 योजनाएं हैं. सात से लेकर 55 वार्ड में सड़क, नाली व अन्य विकास योजनाओं का काम होना है. कुछ संवेदकों का एग्रीमेंट हो चुका है. कुछ संवेदकों ने मौखिक रूप से काम भी शुरू कर दिया है.
इसी बीच पिछले दिनों भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने निगम के सहायक अभियंता पर कार्रवाई की. नगर निगम प्रशासन ने अगले आदेश तक एकरारनामा पर रोक लगा दी. संवेदक सूत्रों की मानें तो लगभग 15 संवेदकों का एग्रीमेंट हो चुका है.
एकरारनामा की लंबी लिस्ट है. जिन संवेदक का एग्रीमेंट हो चुका है, उन्हें अब तक वर्क ऑर्डर नहीं मिला है. अचानक एकरारनामा पर रोक से संवेदकों की परेशानी बढ़ गयी है. संवेदकों का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को महापौर व नगर आयुक्त से मिलकर एकरारनामा शुरू करने का आग्रह करेगा.
नगर निगम में रजिस्टर्ड हैं लगभग एक हजार संवेदक
नगर निगम में लगभग एक हजार संवेदक हैं. चार श्रेणियों में संवेदकों को विभक्त किया गया है. दस लाख तक की योजनाओं का काम करने वाले छोटे संवेदकों को ग्रुप डी में रखा गया है. दस लाख से पचास लाख तक काम करनेवाले को ग्रुप सी में रखा गया है.
पचास लाख से ढाई करोड़ तक काम करनेवाले संवेदकों को ग्रुप बी और ढ़ाई लाख से उपर यानी अनलिमिटेड योजनाओं पर काम करनेवाले संवेदकों को ग्रुप ए में रखा गया है. हालांकि ग्रुप एक में दस से बारह संवेदक ही हैं.
