गिरिडीह : सदर अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक ड्यूटी आवर के बाद कब-कब निजी प्रैक्टिस करते हैं, इसकी जानकारी मांगने के बावजूद किसी ने भी अपना प्रतिवेदन सिविल सर्जन कार्यालय को जमा नहीं किया है. उपायुक्त के निर्देश पर सिविल सर्जन की ओर से जारी आदेश के 11 दिन बीत जाने के बाद भी किसी चिकित्सक ने जवाब नहीं दिया है.
इधर इसके लिए निर्धारित अवधि 24 अगस्त गुजर जाने के बाद भी प्रतिवेदन जमा नहीं कर आदेश की अवहेलना से नाराज सिविल सर्जन डाॅ रामरेखा प्रसाद ने संबंधित चिकित्सकों को 28.8.2018 को रिमाइंडर भेजा है. इन चिकित्सकों को एक सप्ताह का समय दिया गया है. कहा है कि इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने पर इसकी सारी जवाबदेही चिकित्सक की होगी.
बता दें कि कि सदर अस्पताल में ड्यूटी के समय चिकित्सकों के गायब रहने से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराये बगैर लौट रहे हैं. काउंटर में पंजीकरण कराने के बाद मरीज चिकित्सक की प्रतीक्षा में लंबे समय तक बैठे रहते हैं. घंटों इंतजार के बाद उन्हें लौट जाना पड़ता है.उनकी यह स्थिति यहां पिछले एक पखवारा से देखी जा रही है.
मरीज आते हैं, लेकिन चिकित्सक के केबिन में खाली कुर्सी देखकर लौट जाते हैं. यह मामला उपायुक्त की अध्यक्षता में सदर अस्पताल के अस्पताल प्रबंधन समिति की हुई बैठक में भी सामने आया था. उस बैठक में सबसे पहला प्रस्ताव चिकित्सकों से ड्यूटी के अलावा किस-किस समय में निजी प्रेक्टिस करते हैं इसका प्रतिवेदन मांगने का लिया गया था. इसे लेकर उपायुक्त के निर्देश पर सिविल सर्जन डॉ रामरेखा प्रसाद ने बीते 20 अगस्त 2018 को आदेश जारी कर प्रतिवेदन मांगा था.
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डाॅ रामरेखा प्रसाद कहते हैं कि उपायुक्त के निर्देश पर चिकित्सकों को ड्यूटी आवर के बाद वे किस-किस समय में निजी प्रेक्टिस करते हैं इसका प्रतिवेदन सभी चिकित्सकों को मांगा गया है. समय निकल जाने के बाद भी किसी भी चिकित्सक ने अबतक इसका प्रतिवेदन जमा नहीं किया है.रिमाइंडर भेजा गया है. नहीं जमा करने पर कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा.
