प्रसव के बाद तीन घंटे तक तड़पती रही प्रसूता, मौत

गांडेय : प्रसव के बाद प्रसूता तीन घंटे तक तड़पती रही, लेकिन चिकित्सक के नहीं रहने व एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण उसकी मौत हो गयी. मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गांडेय का है. घटना रविवार देर रात की है. सूचना पर सोमवार की सुबह झामुमो नेता-कार्यकर्ता पीड़ित के घर पहुंचे. मामले की […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 14, 2018 6:59 AM
गांडेय : प्रसव के बाद प्रसूता तीन घंटे तक तड़पती रही, लेकिन चिकित्सक के नहीं रहने व एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण उसकी मौत हो गयी. मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गांडेय का है. घटना रविवार देर रात की है. सूचना पर सोमवार की सुबह झामुमो नेता-कार्यकर्ता पीड़ित के घर पहुंचे. मामले की जांच व दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सीएचसी पहुंचे व जमकर हंगामा किया. हालांकि, पुलिस प्रशासन व प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से वार्ता व आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ.
क्या है मामला : मृतका के पिता झामुमो नेता लीलाधर यादव (भोगतिया लोहारी निवासी) ने बताया कि वह अपनी पुत्री पुष्पा देवी (पति जगन्नाथ यादव) को प्रसव पीड़ा होने पर सहिया ललीता देवी के साथ रविवार दोपहर करीब दो बजे सीएचसी गांडेय पहुंचे.
चिकित्सक व एएनएम से उसकी जांच की और रात के सात-आठ बजे तक प्रसव होने की बात कही. इधर, रात के सवा आठ बजे नाॅर्मल डिलेवरी हुई और नवजात शिशु भी स्वस्थ थी. करीब एक घंटे बाद पुष्पा का रक्तस्राव तेज हो गया और उसके सीने में जलन होने लगी. बेटी को तड़पते देख उसने एएनएम को चिकित्सक बुलाने व एंबुलेंस की व्यवस्था कर रेफर करने को कहा,
लेकिन रात में यहां चिकित्सक के नहीं रहने के कारण न तो पुत्री का सही से इलाज हो पाया और न ही एंबुलेंस की व्यवस्था हो पायी. इसके बाद करीब 12 बजे वह खुद एक ऑटो की व्यवस्था कर सहिया के सहयोग से बेटी को सदर अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया.
चिकित्सा पदाधिकारी ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
हो-हंगामे के बीच प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने चिकित्सक की अनुपस्थिति व लापरवाही से प्रसूता की मौत का कारण स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने का आश्वासन दिया. कहा कि ड्यूटी के दौरान अनुपस्थित चिकित्सक के खिलाफ स्पष्टीकरण की मांग करते हुए सीएस को पत्राचार किया जायेगा. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के लिखित आश्वासन के बाद झामुमो का प्रतिनिधिमंडल शांत हुआ.