गिरिडीह : जिले में संचालित उप स्वास्थ्य केंद्रों में अधिकांश जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं. ऐसे में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की बात बेमानी साबित हो रही है. ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी दयनीय है.
एएनएम संघ(महिला संघर्ष समिति) ने बताया कि गिरिडीह जिले में कुल 180 स्वास्थ्य उप केंद्र संचालित हैं. इनमें 84 केंद्र को एल वन चयनित किया गया है. एल वन के लिए चयनित केंद्रों में प्रसव कराना सुनिश्चित किया गया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इन सभी केंद्रों में प्रसव कराने की कोई सुविधा नहीं है. केंद्र की स्थिति से बार-बार विभाग को अवगत कराने के बाद भी अबतक कोई सुधार नहीं हुआ है.
इन केंद्रों में अधिकांश के भवन तो जर्जर हैं. साथ ही इक्के-दुक्के को छोड़ किसी भी केंद्र में न बिजली है, न पानी की सुविधा है, न आवासीय सुविधा है और न प्रसव कराने के लिए अन्य संसाधन मौजूद है. केंद्र में प्रसव कराने या मरीज को रखने के लिए बेड की सुविधा तक नहीं है. केंद्र में सफाईकर्मी है न वाचमैन है. प्रसव कराने के बाद रात में रहने के लिए वहां कोई व्यवस्था नहीं है. तिसरी के एक सब सेंटर में सीआरपीएफ का बसेरा है.
गांडेय के ताराटांड़ में केंद्र का अपना भवन है ही नहीं, किराये पर केंद्र चल रहा है. रेंबा में करीब 20 हजार की आबादी पर एक एएनएम है. मिर्जागंज केंद्र में करीब 35 हजार की आबादी में एक एएनएम प्रसव करा रही है. वहीं गांडेय प्रखंड में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए निर्मित भवन में अब तक स्वास्थ्य सेवा शुरू नहीं की गयी है, जिससे लाखों की लागत से निर्मित भवन बेकार पड़ा है.
क्या कहता है एएनएम संघ
इधर महिला संघर्ष समिति (एएनएम संघ) की अध्यक्ष कल्पना सिंह और सचिव नीलम कुमारी ने सिविल सर्जन से माह में एक बार प्रखंडों की एएनएम के साथ बारी-बारी से बैठक कर उनकी गतिविधियों की समीक्षा करने की मांग की है, ताकि उन्हें क्षेत्र की समस्याओं, उपलब्धियों तथा उप स्वास्थ्य केंद्रों की हालत से अवगत कराया जा सके. उनका कहना है कि क्षेत्र में एएनएम सुदूर क्षेत्रों में गांव-गांव जाकर टीके लगाती हैं, एएनसी जांच कराती हैं. इसके बाद भी उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता है.
