टीबी रोग के उन्मूलन को लेकर देश के 50 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट योजना शुरू हो रही है. 50 जिलों में गिरिडीह जिला भी शामिल है. इसमें जमुआ और सरिया को चयनित किया गया है. दोनाें प्रखंडों में अब बलगम की जांच साधारण वातावरण में ट्रू नेट मशीन से होगी.
गिरिडीह टीबी की पहचान के लिए अब बलगम की जांच साधारण वातावरण में ही की जा सकेगी. इसके लिए वातानुकूलित कमरे की आवश्यकता नहीं होगी और न अब उन्हें किसी बड़े तकनीकी संस्थान में जाने की जरूरत होगी. इस मशीन के संचालन में बिजली की खपत भी काफी कम है. देश के 50 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हो रही इस योजना के सफल होने पर इसे प्रत्येक प्रखंडों में चालू किया जायेगा. गिरिडीह जिला में जमुआ और सरिया को इसके लिए चयनित किया गया है.
झारखंड के पांच जिले में लगेगी मशीन : केंद्र सरकार की ओर से आयोजित इस प्रोजेक्ट में झारखंड के पांच जिले शामिल किये गये हैं. प्रत्येक जिला में दो केंद्र बनाये जा रहे हैं. न्यूक्लिक एसिड एंप्लीफिकेशन टेस्ट (ट्रू नेट) नामक इस मशीन में यह क्षमता है कि कम बिजली की खपत में कम समय में साधारण वातावरण में यह बलगम की जांच कर सकेगा. यह मशीन संबंधित मरीज का डीएनए का भी टेस्ट करेगी. वर्तमान समय गिरिडीह जिला में सीबी नेट मशीन से क्षय रोगियों की जांच की सुविधा है. यह मशीन मरीजों को दी जाने वाली दवा की सक्रियता की भी जांच करती है. पहले यह सुविधा बेंगलुरु में थी. इसके लिए महीनों समय बीत जाता था. यह सुविधा जिला यक्ष्मा केंद्र गिरिडीह में फरवरी 2016 से ही शुरू हो गयी है. अब इसे बिरनी पीएचसी में भी लगाया जायेगा. इससे जिला भर में इसकी संख्या बढ़ कर दो हो जायेगी.
जिला में है 13 टीबी यूनिट
गिरिडीह जिले में कुल 13 टीबी यूनिट हैं. इनमें नौ संचालित और 4 प्रस्तावित हैं, जबकि 18 बलगम जांच केंद्र हैं. टीबी यूनिट में जिला यक्ष्मा केंद्र गिरिडीह, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गांडेय, बेंगाबाद, रेफरल अस्पताल डुमरी, पीएचसी जमुआ, रेफरल अस्पताल राजधनवार, पीएचसी बगोदर, देवरी और बिरनी शामिल है. इसके अलावा चार और यूनिट प्रस्तावित किये गये हैं. इनमें पीरटांड़, गावां, तिसरी और सरिया पीएचसी को बनाया गया है. इसके अलावा बलगम जांच केंद्र में पीएचसी उदनाबाद, गांडेय, बेंगाबाद, डुमरी, निमियाघाट, पीरटांड़, पालगंज, जमुआ, राजधनवार, गावां, बगोदर, अटका, सरिया, देवरी, तिसरी, बिरनी और बेलाटांड़ का मिशन अस्पताल को बनाया गया है. जिले में टीबी रोग उन्मूलन के लिए अक्षय परियोजना के तहत दो गैर सरकारी संस्थाएं भी कार्य कर रही है. जिससे मरीजों में जागरूकता आयी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ अनिल कुमार खेतान का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से ट्रू नेट मशीन गिरिडीह के सरिया और जमुआ में लगायी जा रही है. मशीन की जांच करने के बाद यह सफल साबित हुआ तो इसे जिला के सभी प्रखंडों में लगाया जायेगा. यह कार्य पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लिया गया है. टीबी उन्मूलन की दिशा में गिरिडीह बेहतर कार्य कर रहा है. यहां हर साल लगभग डेढ़ हजार से अधिक मरीजों को रोग मुक्त किया जा रहा है.
