गढ़वा
. गढ़वा प्रखंड के हुर मध्या गांव स्थित हजरत अब्दुल लतीफ बियाबानी रहमतुल्लाह अलैह (अनजान शहीद) का सालाना उर्स-ए-पाक गुरुवार को बड़े ही अकीदत के साथ मनाया गया. इस मौके पर देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ा.झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश सहित दूर-दराज के इलाकों से लोग पहुंचे. सुबह से ही मजार-ए-शरीफ पर चादरपोशी, दुआ और फातिहा पढ़ने का सिलसिला शुरू हो गया. सबसे पहले उर्स आयोजन कमेटी की ओर से मजार पर चादर चढ़ायी गयी. इसके बाद आम अकीदतमंदों ने अपनी-अपनी मन्नतें मांगते हुए चादरपोशी की. इस उर्स-ए-पाक में खास बात यह रही कि मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ हिंदू समुदाय के लोगों ने भी पूरी आस्था के साथ मजार पर चादर चढ़ायी और प्रसाद अर्पित किया. श्रद्धालुओं ने धार्मिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण पेश किया. कई श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर अपने बच्चों का मुंडन भी मजार परिसर में करवाया. वहीं, बड़ी संख्या में लोगों ने सिरनी बनवाकर फातिहा पढ़वाया और शांति एवं खुशहाली की दुआ मांगी.श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए व्यापक प्रबंधन किया गया था.भीड़ को नियंत्रित करने और कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए उर्स-पाक मैनेजिंग कमेटी, रहबर वेलफेयर सोसाइटी, अंजुमन शाने वतन और सुन्नते इस्लामिया कमेटी ऑफ गढ़वा ने मिलकर नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था की थी. सभी समितियों के सदस्य लगातार सक्रिय रहे और भीड़ प्रबंधन में अपनी भूमिका बखूबी निभाई. पूरे उर्स-ए-पाक के दौरान मजार परिसर में मेले जैसा माहौल बना रहा. जगह-जगह दुकानों की सजावट, खान-पान के स्टॉल, मीठे पकवान और खिलौनों की दुकानें भी आकर्षण का केंद्र बनीं. छोटे-बड़े, महिलाएं और बच्चे सभी पूरे उत्साह के साथ उर्स में शामिल हुए.स्थानीय लोगों ने बताया कि हजरत अब्दुल लतीफ बियाबानी रहमतुल्लाह अलैह के दरबार में आकर जो भी सच्चे दिल से मन्नत मांगता है, उसकी मुरादें पूरी होती हैं. इसी विश्वास के साथ दूर-दूर से श्रद्धालु हर साल यहां हाजिरी देने आते हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
