रमकंडा में यूरिया संकट, किसानों को ऊंचे दामों पर खाद खरीदने की मजबूरी

लाइसेंसी दुकानों में खाद नहीं होने से किसान परेशान, फसल की पैदावार पर संकट

लाइसेंसी दुकानों में खाद नहीं होने से किसान परेशान, फसल की पैदावार पर संकट मुकेश तिवारी, रमकंडा जिले के सुदूरवर्ती रमकंडा प्रखंड में यूरिया संकट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. प्रखंड की सभी लाइसेंसी खाद-बीज की दुकानों और रमकंडा पैक्स में यूरिया पूरी तरह खत्म हो गया है. हालात यह हैं कि 300 से 350 रुपये प्रति बोरी मिलने वाला यूरिया अब किसानों को 600 से 700 रुपये तक खरीदना पड़ रहा है. धान की फसल में इस समय यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन लाइसेंसी दुकानों में स्टॉक नहीं होने से किसान मजबूरन अवैध दुकानदारों से ऊंचे दाम पर खाद खरीदने लगे हैं. इससे उनकी खेती की लागत बढ़ गयी है और फसल की पैदावार पर भी संकट गहराने का डर है. किसानों का कहना है कि सरकार भले ही सब्सिडी पर सस्ता खाद उपलब्ध कराने का दावा करती हो, लेकिन हकीकत यह है कि वे कालाबाजारी करने वालों के शिकार हो रहे हैं. किसानों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर जल्द ही लाइसेंसी दुकानों में यूरिया की आपूर्ति नहीं की गयी तो धान की फसल प्रभावित होगी. उन्होंने मांग की है कि अवैध दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और किसानों को राहत दिलायी जाए. ………….. 550 रुपये में खरीदना पड़ा यूरिया: गणेश बैठा मंगराही गांव के किसान गणेश बैठा ने बताया कि उन्होंने रमकंडा बाजार में पिंटू साह की दुकान से 550 रुपये में यूरिया खरीदा. पैक्स और अन्य लाइसेंसी दुकानों में यूरिया नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरन महंगे दाम पर खरीदना पड़ा. …………… अधिक पैसे देकर खरीदा यूरिया: लखन सिंह बिराजपुर गांव के किसान लखन सिंह ने कहा कि अधिक पैसे देकर यूरिया खरीदना पड़ा. पैक्स में यूरिया नहीं मिलने से उन्होंने 600 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से रमकंडा बाजार की अवैध दुकानों से खरीदारी की. यह वहीं यूरिया है, जो पैक्स में पहले 320 रुपये में मिलता था. ………………. काफी तालाश के बाद महंगे दाम में खरीदा यूरिया: जिलानी अंसारी मुड़खुर गांव के किसान जिलानी अंसारी ने बताया कि धान और मक्का की फसल के लिए उन्होंने एक सप्ताह तक कई दुकानों में तलाश की, लेकिन यूरिया नहीं मिला. आखिरकार उन्हें उदयपुर के एक दुकान से 450 रुपये में खरीदना पड़ा. ……….. पैक्स से भी खाली हाथ लौटना पड़ा: रामचंद्र साव रमकंडा गांव के किसान रामचंद्र साव ने बताया कि दो दिन पहले जब वे यूरिया लेने पैक्स गए तो संचालक ने उन्हें स्टॉक खत्म होने की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि पैक्स से किसानों को सस्ते दाम पर खाद मिल जाता है, लेकिन स्टॉक खत्म होने से अब उन्हें महंगे दाम पर खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है.

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Author: DEEPAK

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