भवनाथपुर-मेराल रेल लाइन का अस्तित्व खतरे में
विजय सिंह, भवनाथपुर भवनाथपुर से मेराल तक बिछायी गयी सेल की 34 किलोमीटर लंबी रेल लाइन अब इतिहास के पन्नों में सिमटती जा रही है. 60 के दशक में डोलोमाइट और चूना पत्थर की ढुलाई के लिए बनायी गयी यह लाइफलाइन आज प्रबंधन की उदासीनता और अपराधियों के बढ़ते हौसले के कारण अपना वजूद खो रही है. पिछले पांच वर्षों से लगातार जारी चोरी के कारण इस रेल खंड में अब सिर्फ पटरियों का ढांचा ही बचा रह गया है. उल्लेखनीय है कि इस रेल लाइन के माध्यम से चूना पत्थर और डोलोमाइट सेल के विभिन्न स्टील प्लांटों में भेजा जाता था. वर्ष 2014 में चूना पत्थर खदान और 16 फरवरी 2020 को डोलोमाइट खदान बंद होने के बाद से इस मार्ग से मालगाड़ियों का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया. इसके बाद पहले लोहा चोरों ने इस पर धावा बोला और पटरियों सहित अन्य कीमती उपकरणों की चोरी शुरू कर दी. रही-सही कसर अब पत्थर माफिया पूरी कर रहे हैं, जो रेल लाइन के नीचे बिछाये गये पत्थरों को अवैध रूप से उठा रहे हैं. वर्तमान में अमवाडीह के समीप पत्थर चोरी का खेल धड़ल्ले से जारी है. 30 साल पुराना सपना हुआ चकनाचूरस्थानीय ग्रामीण और राजनीतिक दल पिछले 30 वर्षों से भवनाथपुर से बरवाडीह तक सेल की इस लाइन पर पैसेंजर ट्रेन चलाने की मांग कर रहे है. क्षेत्र के विकास के लिए यह एक बड़ा मुद्दा था, लेकिन पटरियों और पत्थर की चोरी होने के बाद अब पैसेंजर ट्रेन चलाने की उम्मीदें पूरी तरह धराशायी होती दिख रही हैं. बताया गया कि चार वर्ष पूर्व गढ़वा एसपी ने स्वयं भवनाथपुर पहुंचकर रेल लाइन का निरीक्षण किया था. उस वक्त उन्होंने स्पष्ट कहा था कि पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है, लेकिन रेल संपत्ति की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की है. इसके बावजूद सेल अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण चोरों के हौसले बुलंद हैं. अधिकारियों की इसी चुप्पी के कारण करोड़ों की सरकारी संपत्ति माफियाओं की भेंट चढ़ रही है. लोगों का कहना हैं कि सेल प्रबंधन की निष्क्रियता के कारण लोहा और पत्थर माफिया का मनोबल बढ़ा हुआ है. अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाये गये, तो यह 34 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पूरी तरह नक्शे से गायब हो जायेगी.
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