गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट
Garhwa News: झारखंड के गिरिडीह में हाल ही में गोलगप्पे खाने से 40 से अधिक लोगों के बीमार होने की घटना के बाद अब गढ़वा जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. प्रशासन नहीं चाहता कि जिले में ऐसी कोई अनहोनी हो. इसी कड़ी में शहर के स्ट्रीट फूड ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई.
जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आर.एस. सिंह और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी दीपश्री की संयुक्त टीम ने शहर के गली-मोहल्लों में बिकने वाले गोलगप्पा, चाट, मोमोज और पनीर चिल्ली की दुकानों की सघन जांच की. इस दौरान जो नजारा दिखा वह डराने वाला था. दुकानदार न तो हाथों में ग्लव्स पहन रहे थे और न ही सिर पर हेडगियर. प्रशासनिक जांच में पाया गया कि खाने को रंगीन बनाने के लिए प्रतिबंधित रंगों का इस्तेमाल हो रहा था. मौके पर मिले मिलावटी पनीर को प्रशासन ने तुरंत नष्ट करवा दिया. अधिकतर वेंडिंग कार्ट और दुकानों के आसपास साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं था.
जागरूकता पर भी जोर
गिरिडीह की घटना से सबक लेते हुए प्रशासन अब केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है. अब फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों को ‘स्वच्छता का पाठ’ पढ़ाया जाएगा. इसके लिए 6 मई (बुधवार) की तारीख तय की गई है. इस दिन सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें वेंडर्स को बताया जाएगा कि ग्राहकों की सेहत के साथ बिना खिलवाड़ किए बिजनेस कैसे करें.
कार्रवाई की चेतावनी
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कई वेंडर्स के पास अनिवार्य खाद्य सुरक्षा लाइसेंस नहीं है. अधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी है कि जो भी वेंडर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 का पालन नहीं करेगा, उसकी दुकान बंद करा दी जाएगी.फलों की दुकानों की भी जांच हुई, जहां कार्बाइड मुक्त फल बेचने का कड़ा निर्देश दिया गया.
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