गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट
Garhwa News: गढ़वा जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ‘श्री बंशीधर नगर’ के नाम में आंशिक संशोधन कर ‘उंटारी’ शब्द जोड़े जाने के कैबिनेट के फैसले ने इलाके में सियासी पारा चढ़ा दिया है. इस मुद्दे को लेकर भवनाथपुर विधायक अनंत प्रताप देव और पूर्व विधायक सह भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है. जहां एक पक्ष इसे ऐतिहासिक बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे ‘राजशाही अहंकार’ की पूर्ति करार दे रहा है.
विधायक ने निर्णय को ऐतिहासिक बताया
विधायक अनंत प्रताप देव ने हेमंत सरकार के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया है.उन्होंने पिछली रघुवर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा उंटारी शब्द को हटाकर यहां के गौरवशाली इतिहास को समाप्त करने की साजिश रची गई थी. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मथुरा या वृंदावन का नाम बदला गया? तो फिर यहां से उंटारी क्यों हटाया गया था. 2017 में भी मैंने उंटारी शब्द बनाए रखने की मांग की थी, जिसे अनसुना कर दिया गया. यह प्रभु श्री कृष्ण की ही लीला है कि आज उन्हीं के आशीर्वाद से उंटारी शब्द को दोबारा जोड़ा गया है.
भानु प्रताप शाही का सरकार पर तीखा हमला
दूसरी ओर, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने राज्य सरकार के इस फैसले पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने विधायक अनंत प्रताप देव को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह निर्णय किसी जनहित के लिए नहीं, बल्कि केवल ‘राज शाही’ आकांक्षा और अहंकार की पूर्ति के लिए लिया गया है. कहा कि राजतंत्र के दौर में अंग्रेजों ने जो क्षेत्र दिया था, उसमें आज उंटारी पलामू का हिस्सा है. भानु ने कहा कि बेहतर होता यदि विधायक नाम में ‘गोविंदा’ ‘राधा कृष्ण’, कन्हैया कृष्ण शब्द जुड़वाते. सरकार से उंटारी जोड़ने के बजाय ‘श्री बंशीधर कॉरिडोर’ की मांग करनी चाहिए थी, जिससे क्षेत्र का विकास होता.
2017 में बदला गया नाम
ज्ञात हो कि वर्ष 2017 में तत्कालीन रघुवर सरकार ने पहली बार आयोजित श्री वंशीधर महोत्सव के दौरान नगर उंटारी का नाम बदलकर ‘श्री बंशीधर नगर’ कर दिया था. लंबे समय से स्थानीय विधायक अनंत प्रताप देव उंटारी शब्द को वापस जोड़ने की मांग उठा रहे थे, जिसे हाल ही में कैबिनेट ने मंजूरी दी है. अब इस नामकरण को लेकर इलाके में ‘इतिहास बनाम विकास’ की राजनीति शुरू हो गई है.
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