स्थायित्व बढ़ाने वाला है स्कूल रुआर कार्यक्रम

स्थायित्व बढ़ाने वाला है स्कूल रुआर कार्यक्रम

खरौंधी. खरौंधी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय चंदनी के प्रांगण में मंगलवार को स्कूल रुआर कार्यक्रम 2025 की सफलता सुनिश्चित करने के लिए प्रखंड स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया. कार्यशाला का उद्घाटन प्रखंड विकास पदाधिकारी रवींद्र कुमार, चंदनी पंचायत के मुखिया रामगहन मेहता और बीपीएम नवीन प्रकाश ने संयुक्त रूप से किया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रखंड क्षेत्र के प्रधानाध्यापक, शिक्षक एवं शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे. बीडीओ रवींद्र कुमार ने कहा कि विभागीय स्तर पर विभिन्न योजनाएं, कार्यक्रम और विशेष सुविधाएं होने के बावजूद यदि बच्चों के नामांकन व विद्यालय में ठहराव में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है, तो यह हम सभी के लिए चिंतन का विषय है. केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, शिक्षक, अभिभावक और पूरे समुदाय को मिलकर इसमें योगदान देना होगा. यदि हम सभी मिलकर प्रयास करें, तो स्कूलों में बच्चों की स्थायित्व और गुणवत्ता में सकारात्मक परिवर्तन संभव है. उन्होंने सभी शिक्षकों से कहा कि वे विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का ईमानदारी से पालन करें और इस कार्यक्रम को एक जन अभियान के रूप में सफल बनायें. सबकी सहभागिता की अपील : बीपीएम नवीन प्रकाश ने स्कूल रुआर कार्यक्रम के अंतर्गत आगामी 16 दिनों तक चलने वाली गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी. कहा कि इसमें बच्चों के घर-घर जाकर संपर्क करना, माता-पिता की बैठकें करना, नामांकन व पुनः नामांकन को बढ़ावा देना और स्कूलों की साफ-सफाई व रंगाई-पुताई जैसे कार्य शामिल हैं. उन्होंने शिक्षक समुदाय से कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की अपील की. बीआरपी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल स्कूलों में बच्चों के स्थायित्व और भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है. उपस्थित लोग : इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि राम खेलावन पासवान, झामुमो नेता बिनोद यादव, हिफाजत अंसारी, सीआरपी दिनेश कुमार दुबे, अर्चना कुमारी, प्रधानाध्यापक अनिल कुमार तिवारी, अमरेश कुमार राम, कामेश्वर प्रसाद सिंह, सतेंद्र दास, राजीव रंजन द्विवेदी, अंजनी कुमार द्विवेदी, जितेंद्र सिंह, गोविंद उरांव, अरविंद साह, अरविंद प्रसाद, मिथलेश पाल, सोहराब अंसारी, मो. जमालुद्दीन, मो मृत्युंजय कुमार दुबे व मुखिया प्रतिनिधि सतीश कुमार राम सहित अन्य मौजूद थे.

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नगर निकाय चुनाव में नहीं चला विधानसभा का गणितगढ़वा नगर परिषद चुनाव में भाजपा, झामुमो, कांग्रेस व राजद को उम्मीद से कम मिले मत- अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने चौंकाया- पिछले मत प्रतिशत को बरकरार नहीं रख सके बड़े दलपीयूष तिवारी, गढ़वागढ़वा नगर परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद प्रत्याशियों को मिले मतों और उनके जीत-हार के समीकरणों की चर्चा शहर के नुक्कड़ों और चौक-चौराहों पर तेज हो गयी है. बिना किसी दल और बड़े नेताओं के समर्थन के दौलत सोनी की अध्यक्ष पद पर जीत ने सभी को चौंका दिया है. इस चुनाव में झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाजपा जैसे बड़े दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. लेकिन परिणामों ने इन दलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. करीब 15 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इन दलों को जो मत मिले थे, उन्हें वे अपने समर्थित प्रत्याशियों के माध्यम से बरकरार नहीं रख सके. सबसे खराब स्थिति भाजपा की रही है. विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा शहर के 33 बूथों में से 30 बूथों पर पहले स्थान पर रही थी. शहरी क्षेत्र से पार्टी को 15 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे. इसके विपरीत नगर निकाय चुनाव में भाजपा के अध्यक्ष पद की प्रत्याशी कंचन जायसवाल को मात्र 2582 मत मिले. यदि भाजपा के बागी प्रत्याशी अलखनाथ पांडेय को मिले 2701 मत भी जोड़ दिये जाएं, तो कुल आंकड़ा लगभग 5300 तक ही पहुंचता है. यह संख्या विधानसभा चुनाव में मिले मतों की तुलना में काफी कम है.पिछले निकाय चुनाव के मत भी नहीं बचा सकी भाजपावर्ष 2018 के नगर निकाय चुनाव में अलखनाथ पांडेय की पत्नी मीरा पांडेय ने भाजपा के टिकट पर उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था. उन्हें 6899 मत मिले थे. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वाले विनोद जायसवाल (2026 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी कंचन जायसवाल के पति) को 3810 मत प्राप्त हुए थे. वर्तमान चुनाव में ये दोनों ही परिवार अपने पुराने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके. न तो विधानसभा चुनाव में मिले मतों को बरकरार रख पाये और न ही पिछले निकाय चुनाव के आंकड़े तक पहुंच सके.झामुमो और कांग्रेस का गठजोड़ भी नहीं दिला सका जीतगढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो ने संतोष केसरी को अपना समर्थित प्रत्याशी बनाया था. कांग्रेस ने भी उन्हें समर्थन दिया. दो बड़े दलों के समर्थन के बावजूद संतोष केसरी को मात्र 3790 मत प्राप्त हुए. वर्ष 2018 के निकाय चुनाव में महिला आरक्षित सीट होने के कारण संतोष केसरी की पत्नी पिंकी केसरी अध्यक्ष पद की प्रत्याशी थीं. तब उन्हें 6411 मत मिले थे और वे भाजपा प्रत्याशी थीं. उसी चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कमर सफदर को केवल 420 मत प्राप्त हुए थे. दोनों दलों को उम्मीद थी कि संयुक्त रूप से वे करीब सात हजार मत प्राप्त कर संतोष केसरी को जीत दिला देंगे. लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी.54 मतों से हारने वाली अनिता दत्ता को इस बार केवल 215 मतवर्ष 2018 के नगर परिषद चुनाव में झामुमो की प्रत्याशी अनिता दत्ता को 6357 मत मिले थे. वे मात्र 54 मतों के अंतर से पिंकी केसरी से हार गयी थीं. इस बार अनिता दत्ता को किसी दल का समर्थन नहीं मिला और वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं. लेकिन उन्हें केवल 215 मतों से ही संतोष करना पड़ा.राजद भी पिछला प्रदर्शन दोहराने में विफलनगर परिषद चुनाव 2026 में राजद ने विकास माली को समर्थन दिया. विकास माली को 1222 मत प्राप्त हुए. जबकि वर्ष 2018 के चुनाव में राजद समर्थित प्रत्याशी मनिका नारायण को 5117 मत मिले थे. वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए राजद प्रत्याशी मो शमीम को 2018 में 3728 मत प्राप्त हुए थे. कुल मिलाकर नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने दलों की बजाय प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी. बड़े दलों की रणनीति और पुराने मत प्रतिशत इस चुनाव में कारगर साबित नहीं हुए.

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