रिश्वत नहीं देने पर योजना से नाम कटा, राशन कार्ड में बदल दिया नाम व आधार

गढ़वा में रिश्वत न देने पर मजदूर का नाम योजना से काटा गया और राशन कार्ड में आधार नंबर बदल दिया गया. उपायुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं.

गढ़वा: सरकारी कार्यालयों की लालफीताशाही और निचले स्तर पर कार्यरत कर्मियों की मनमानी किस तरह गरीबों का हक छीन रही है, इसकी तस्वीर शुक्रवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित जनसुनवाई के दौरान सामने आयी. उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा के समक्ष पहुंचे दो मामलों ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही गंभीर अनियमितताओं की पोल खोल दी.

दोनों मामलों में सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर लाभुकों को योजनाओं से वंचित करने का आरोप सामने आया. शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ने निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया. नगर ऊंटारी प्रखंड के बंबा गांव की रहने वाली रेशमी कुमारी ने जनसुनवाई में बताया कि वह झारखंड मुख्यमंत्री मंईंयां सम्मान योजना की लाभुक थीं.

योजना के भौतिक सत्यापन के दौरान एक स्वयंसेवक ने उनसे अवैध राशि की मांग की. आरोप है कि राशि नहीं देने पर संबंधित कर्मी ने सत्यापन रिपोर्ट में गलत जानकारी दर्ज कर दी. रिपोर्ट में उनके दिहाड़ी मजदूर पति को सरकारी सेवा में कार्यरत दिखा दिया गया. इसके बाद योजना के पोर्टल से उनका नाम हटा दिया गया और उन्हें मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद हो गयी.

रेशमी ने बताया कि उनका परिवार मजदूरी कर किसी तरह जीवनयापन करता है, लेकिन गलत रिपोर्ट के कारण वे योजना के लाभ से वंचित हो गयीं. अब अपना अधिकार वापस पाने के लिए उन्हें लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.

गढ़वा प्रखंड के चिरौंजिया गांव की बुजुर्ग कइली कुंवर का मामला भी जनसुनवाई में सामने आया. उन्होंने बताया कि उन्हें पहले नियमित रूप से राशन मिलता था, लेकिन पिछले चार महीनों से राशन दुकान से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.

मामले की जांच में पता चला कि प्रज्ञा केंद्र और खाद्य आपूर्ति विभाग के रिकॉर्ड में उनके राशन कार्ड से छेड़छाड़ की गयी है. सरकारी अभिलेखों में उनका नाम और आधार संख्या बदलकर किसी अन्य व्यक्ति का विवरण दर्ज कर दिया गया.

इस गड़बड़ी के कारण उनका राशन बंद हो गया. पीड़िता ने बताया कि परिवार का गुजारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन पर काफी हद तक निर्भर है. राशन बंद होने से परिवार को आर्थिक और खाद्य संकट का सामना करना पड़ रहा है.

शिकायतों की निष्पक्ष व स्थलीय जांच का निर्देश

दोनों मामलों को सुनने के बाद उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दोनों शिकायतों की निष्पक्ष एवं स्थलीय जांच कराने का निर्देश दिया. साथ ही स्पष्ट किया कि जांच में यदि किसी कर्मी की लापरवाही, फर्जी रिपोर्ट या रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.

उपायुक्त ने कहा कि सरकार की योजनाएं जरूरतमंद लोगों तक पारदर्शिता के साथ पहुंचनी चाहिए और किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

भूमि विवाद, पेंशन समेत अन्य योजनाओं से जुड़ी शिकायते मिलीं

जनसुनवाई के दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे लोगों ने भी अपनी समस्याएं उपायुक्त के समक्ष रखीं. इनमें भूमि विवाद, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन, आवास, पेयजल तथा अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतें शामिल थीं.

उपायुक्त ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को सभी मामलों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने तथा पात्र लोगों को समय पर योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.


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By Prabhat khabar news desk

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