286 वर्षों से रंका में निभाई जा रही रथयात्रा की ऐतिहासिक परंपरा, तैयारियां पूरी फोटो:- नंद कुमार रंका (गढ़वा): गढ़वा जिला अंतर्गत रंका प्रखंड में श्रद्धा और उल्लास के अनूठे संगम के रूप में मनायी जाने वाली भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा की परंपरा इस वर्ष 287वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है. इस वर्ष 16 जुलाई गुरुवार को आयोजित होने वाली इस रथयात्रा को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है और इसकी लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ स्वामी के रथ को खींचना बेहद कल्याणकारी और पुण्यदायी माना जाता है, यही वजह है कि इस पावन अवसर पर रथ की रस्सी खींचने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है.
दूर-दराज के इलाकों से भी लोग प्रभु के दर्शन के लिए यहाँ पहुँचते हैं. 150 वर्ष पहले कंचनपुर मौसीबाड़ी जाती थी रथयात्रा: रंका राज परिवार के राजा कुमार गोवर्धन प्रसाद सिंह ने इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 286 वर्ष पूर्व उनके पूर्वजों ने इस भव्य रथयात्रा की शुरुआत की थी, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आज भी पूरी जीवंतता के साथ जारी है. उन्होंने बताया कि करीब 150 वर्ष पूर्व यह रथयात्रा ठाकुरबाड़ी मंदिर से निकलकर कंचनपुर गांव स्थित मौसीबाड़ी तक जाती थी, जहां भगवान जगन्नाथ स्वामी एक सप्ताह तक विश्राम करते थे. हालांकि, कंचनपुर की दूरी अत्यधिक होने के कारण कालांतर में पूर्वजों ने इस व्यवस्था में आंशिक बदलाव किया, जिसके बाद अब रथयात्रा फुलवारी स्थित मौसीबाड़ी तक ही निकाली जाती है. 14 दिनों के एकांतवास के बाद दर्शन देंगे भगवान: परंपरा के मुताबिक, भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा 14 दिनों तक एकांतवास (अनासर) में रहने के बाद स्नान यात्रा के पश्चात श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे. इससे पूर्व मुख्य पुजारी बालेश्वर दुबे और सत्यनारायण ओझा द्वारा तीनों विग्रहों की विधिवत पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठान संपन्न कराया जाएगा, जिसके बाद ही रथयात्रा की शुरुआत होगी। सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं. 56 भोग और 108 दीपों से होगी महाआरती: भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपनी मौसी के घर 8 दिनों तक प्रवास करेंगे, जिसे विशेष रूप से सजाया-संवारा गया है. मौसीबाड़ी में भगवान के आगमन पर 108 दीप प्रज्वलित कर और 56 भोग अर्पित कर महाआरती उतारी जाएगी। इसके पश्चात जब भगवान पुनः अपने घर ठाकुरबाड़ी मंदिर लौटेंगे, तो इसे 'घूरती रथयात्रा' के रूप में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस पूरे भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में कुमार गुलाब सिंह, मुक्ता सिंह, कुमार गौरव सिंह, रवि कुमार सिंह, धीरज कुमार सिंह, आशीष सिंह और सुल्पानी सिंह समेत कई गणमान्य लोग रात-दिन जुटे हुए हैं.
