केतार व केतरी की रामलीला मंडली की गूंज अब पलामू व छत्तीसगढ़ तक

आयोजन के लिए एक से डेढ़ लाख रुपये लेती है मंडली

आयोजन के लिए एक से डेढ़ लाख रुपये लेती है मंडली संदीप कुमार, केतार

गढ़वा जिले के केतार और केतरी की रामलीला मंडली आज भी परंपरा को जीवंत बनाये हुए है. यह मंडली पीढ़ियों से चली आ रही इस सांस्कृतिक धरोहर को न केवल आगे बढ़ा रही है, बल्कि नये आयाम भी दे रही है. अब इसकी लोकप्रियता गांव की सीमाओं से निकलकर पलामू और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ तक फैल चुकी है. पिछले एक दशक में मंडली को पलामू के नीलांबर-पीतांबर नगर (लेस्लीगंज), कुंडेलवा पोखरा, सिंदुरिया और छत्तीसगढ़ के कुसमी क्षेत्र में मंचन के लिए आमंत्रित किया गया. आयोजन के लिए मंडली एक से डेढ़ लाख रुपये तक शुल्क लेती है, जबकि साउंड और स्टेज की व्यवस्था आयोजकों द्वारा की जाती है. दशहरा-दीपावली से पूर्व मंडली 15 दिन पहले तैयारी में जुट जाती है. मंच और ध्वनि व्यवस्था में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से दर्शकों का अनुभव और भी रोचक और प्रभावी हो गया है.

पतिहारी में रामलीला का मंचन कर रही मंडली

वर्तमान में मंडली बिशनपुर प्रखंड के पतिहारी गांव में रामलीला का मंचन कर रही है. इसमें योगेश कुमार चौधरी, आशीष कुमार मेहता, मयंक वेद, विवेक कुमार सिंह, चितरंजन पटेल, हृदयानंद पटेल, राजा कुमार मेहता, आकाश मेहता और कृष्ण मोहन दुबे सहित कई कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं. मंडली के सदस्य योगेश चौधरी ने बताया कि उनके पूर्वज भी रामलीला का मंचन करते थे, जिनसे प्रेरणा लेकर उन्होंने मित्रों के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है.

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By Akarsh Aniket

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