पारा शिक्षक हत्याकांड के 12 साल पुराने केस में बड़ा फैसला, एक दर्जन से अधिक नेता व सामाजिक कार्यकर्ता बरी

गढ़वा कोर्ट ने 14 साल पुराने सड़क जाम मामले में एक दर्जन से अधिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।

गढ़वा: वर्ष 2014 में एक पारा शिक्षक की हत्या के विरोध में हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़क जाम करने के मामले में करीब 12 साल बाद फैसला आया है. गढ़वा व्यवहार न्यायालय ने मामले में एक दर्जन से अधिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बरी कर दिया है. सभी को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी किया गया है.

इस मामले में बरी होनेवालों में बसपा नेता अभिमन्यु सिंह उर्फ बबलू सिंह, पूर्व विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी युगल पाल, पूर्व प्रत्याशी अशरफी चंद्रवंशी, समाजसेवी पुष्परंजन, पूर्व प्रत्याशी ब्रह्मदेव प्रसाद, शकील अंसारी, पत्रकार रामरंजन, अशोक पाल, रामपति यादव और चंदेश्वर राम समेत एक दर्जन से अधिक लोग शामिल हैं.

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पारा शिक्षक की हत्या के बाद हुआ था आंदोलन

बताया गया कि पारा शिक्षक की हत्या के बाद लोगों में आक्रोश था. हत्या के विरोध में हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर इन नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सड़क पर उतरकर जाम करने का आरोप लगाया गया था. इसी आंदोलन के दौरान इन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.

करीब 12 साल बाद मामले में फैसला आया और पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में सभी को बरी कर दिया गया.


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By पियूष तिवारी

पियूष तिवारी गढ़वा जिले में सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. ढाई दशक से भी अधिक के इस सुदीर्घ अनुभव में उन्होंने खोजी पत्रकारिता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया है. पेचीदा प्रशासनिक मामलों का तथ्यपरक विश्लेषण करना और छिपी हुई खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ सामने लाना उनकी कार्यशैली की मुख्य पहचान है.

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