जिले में मलेरिया संक्रमितों की संख्या में बड़ी गिरावट, 2021 में मिले थे 623 मरीज पीयूष तिवारी गढ़वा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2021 में दुनिया के 25 चिह्नित देशों में मलेरिया संचरण रोकने के लिए विशेष पहल शुरू की थी, जिसमें भारत भी शामिल है. इस पहल का सकारात्मक असर गढ़वा जिले में साफ दिख रहा है. वर्ष 2021 में सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 623 मामले सामने आये थे. वहीं 2025 में अब तक जिले में सिर्फ 101 मामले ही सामने आये हैं. कभी बड़े पैमाने पर मलेरिया संक्रमण और मृत्यु दर का सामना कर चुके गढ़वा में अब यह बीमारी नियंत्रण में आ चुकी है. कुछ वर्ष पहले तक ग्रामीण क्षेत्रों में एक साथ दर्जनों लोग मलेरिया से संक्रमित हो जाते थे और कई मामलों में मृत्यु भी हो जाती थी. संक्रमण रोकथाम में स्वास्थ्य विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी. लेकिन डब्ल्यूएचओ की पहल के बाद जिले में राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम को मजबूत किया गया, जिसका परिणाम है कि अब मलेरिया मरीजों की संख्या और मृत्यु दर में 80 से 90 प्रतिशत तक की कमी आयी है. इस कार्यक्रम का असर फाइलेरिया और डेंगू जैसे मच्छरजनित रोगों में भी देखा जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान समय में जिले के भंडरिया प्रखंड में मलेरिया मरीजों की संख्या सर्वाधिक है, जबकि अन्य प्रखंडों में स्थिति काफी बेहतर है. सालवार मलेरिया मरीजों का आंकड़ा (सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीज) 2021 : 623 मरीज सबसे ज्यादा : भंडरिया 203 सबसे कम : धुरकी 6 2022 : 294 मरीज सबसे ज्यादा : भवनाथपुर 120 सबसे कम : भंडरिया 2 2023 : 176 मरीज सबसे ज्यादा : भवनाथपुर 85 सबसे कम : रंका 1 2024 : 109 मरीज सबसे ज्यादा : भंडरिया 43 सबसे कम : रंका 3 2025 (31 अक्टूबर तक) : 101 मरीज सबसे ज्यादा : भंडरिया 40 सबसे कम : रंका और मेराल 6-6 इस आंकड़ें में निजी अस्पतालों के मरीज शामिल नहीं हैं. राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम क्या है इस कार्यक्रम का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश को मलेरिया मुक्त करना है, जबकि झारखंड सरकार ने इसे घटाकर 2027 कर दिया है. कार्यक्रम के तहत घरों की दीवारों और छत पर कीटनाशक छिड़काव, कीटनाशक-उपचारित मच्छरदानी का वितरण, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने के लिए जल प्रबंधन, आउटब्रेक की स्थिति में फॉगिंग, मास फिवर सर्वे व जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. क्या कहते हैं सिविल सर्जन गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ जान एफ केनेडी ने बताया कि एक समय जिले के धुरकी, चिनियां, रंका, रमकंडा, भंडरिया सहित कई क्षेत्रों में पीएफ मलेरिया के भयावह मामले सामने आते थे, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है. उन्होंने बताया कि दवा का नियमित छिड़काव, मेडिकेटेड मच्छरदानी का वितरण, मच्छरदानी का उपयोग करने की आदत, रेडिकल ट्रीटमेंट (बीमारी को जड़ से खत्म करने वाली दवा) और लगातार चलाये गये जागरूकता कार्यक्रम के कारण जिले में मलेरिया पर काबू पाया गया है. डॉ केनेडी ने कहा कि अभी भी लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है. झारखंड सेरेब्रल मलेरिया जोन में आता है. थोड़ी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है. इसलिए सावधान रहें और स्वस्थ रहें.
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