पीयूष तिवारी, गढ़वा गढ़वा शहर के नहर चौक स्थित द न्यू सीटी हॉस्पिटल के संचालक पर पैसे नहीं देने पर नवजात बीमार बच्चे को 24 घंटे से अधिक समय तक अस्पताल में रोके रखने आरोप लगाया गया है. इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने बुधवार को अस्पताल परिसर में हंगामा किया. इस दौरान गढ़वा सदर अस्पताल में निजी अस्पतालों के दलाल सक्रिय रहने और मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल ले जाने का भी आरोप लगाया गया. जिले के खरौंधी प्रखंड अंतर्गत चौरिया गांव निवासी रीना देवी, उनके पति बहादुर चौधरी, रिश्तेदार ओमप्रकाश चौधरी और सरस्वती देवी ने बुधवार को बताया कि 17 जनवरी को श्री बंशीधर सरकारी अस्पताल में रीना देवी ने एक बच्चे को जन्म दिया. जन्म के बाद से ही बच्चा बोल नहीं पा रहा था और उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी. बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे पहले रेफर कर गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां से भी रेफर किये जाने के बाद सदर अस्पताल परिसर में एक युवक उनसे मिला, जिसने झांसा देकर नहर चौक स्थित एक नये अस्पताल न्यू सीटी हॉस्पिटल में ले जाने को कहा. परिजनों का आरोप है कि युवक ने बताया था कि उक्त अस्पताल में एनआइसीयू की सुविधा मात्र दो हजार रुपये प्रतिदिन के खर्च पर उपलब्ध है. परिजनों के अनुसार 18 जनवरी से 3 फरवरी तक बच्चे को न्यू सीटी हॉस्पिटल में रखा गया. परिजनों का कहना है कि 3 फरवरी को उनसे झूठ बोलकर कहा गया कि बच्चा अब स्वस्थ हो गया है और उसे दूसरे अस्पताल ले जाया जा सकता है. इसके बाद बच्चे को छुट्टी दे दी गयी और 1 लाख 12 हजार 880 रुपये का बिल थमा दिया गया. वहीं बिल में 37 हजार 800 रुपये कम होने पर उन्हें बच्चा ले जाने से मना कर दिया गया. बच्चे को ले जाने से नहीं रोका: संचालक इस मामले में अस्पताल संचालक वकील अंसारी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने बच्चे को रोका नहीं है. यदि परिजन पैसे देने में सक्षम नहीं थे, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी. अगर उन्हें बताया जाता, तो वे कुछ राशि कम कर देते. उन्होंने यह भी कहा कि उनके अस्पताल का औपचारिक उद्घाटन अभी नहीं हुआ है, लेकिन उन्हें रजिस्ट्रेशन नंबर प्राप्त हो चुका है.
पैसे नहीं देने पर नवजात को अस्पताल में रोका, हंगामा
पैसे नहीं देने पर नवजात को अस्पताल में रोका, हंगामा
