तैयारी तेज. सिविल सर्जन के निर्देश पर तैयार किया जा रहा प्रस्ताव प्रभाष मिश्रा, गढ़वा जिलेवासियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र से बड़ी राहत की खबर सामने आयी है. गढ़वा सदर अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआइ जैसी अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं शुरू करने की तैयारी विभागीय स्तर पर तेज हो गयी है. सिविल सर्जन डॉ जान एफ केनेडी के निर्देश पर इसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही अंतिम मंजूरी के लिए विभाग को भेजा जायेगा. डीपीएम गौरव कुमार ने बताया कि इन महत्वपूर्ण मशीनों की स्थापना के लिए अस्पताल परिसर में एक अलग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जायेगा. सिविल सर्जन के आदेश पर इस दिशा में कार्य भी शुरू कर दिया गया है. जल्द ही अस्पताल में सीटी स्कैन व एमआरआइ सुविधा मिलेगी. गढ़वा देश के आकांक्षी जिलों में शामिल है, जहां उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव लंबे समय से महसूस किया जाता रहा है. सड़क दुर्घटना, सिर की गंभीर चोट (हेड इंजरी) या अचानक आये स्ट्रोक (पक्षाघात) के मरीजों के लिए तत्काल सीटी स्कैन अत्यावश्यक होता है. वर्तमान में इसकी सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को बिना सटीक जांच के हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है, जिससे कई बार जान का जोखिम बढ़ जाता है. कई मरीज रांची या वाराणसी ले जाने के क्रम में रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं. एमआरआइ सुविधा के अभाव में रीढ़, तंत्रिका तंत्र और जटिल बीमारियों का समय पर और सही निदान नहीं हो पाता.अभी मरीजों को निजी केंद्रों या फिर मेदिनीनगर, रांची, वाराणसी जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है, जो गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ है. अलग कॉम्प्लेक्स क्यों जरूरी? सीटी स्कैन और एमआरआइ मशीनें अत्यधिक संवेदनशील एवं भारी उपकरण हैं, जिन्हें सामान्य कमरों में स्थापित नहीं किया जा सकता. सीटी स्कैन मशीन विकिरण उत्सर्जित करती है, इसलिए दीवारों, फर्श और छत में विशेष लेड शील्डिंग अनिवार्य होती है, जिससे अस्पताल के अन्य हिस्सों और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. एमआरआइ मशीन अत्यंत शक्तिशाली चुंबकों पर आधारित होती है. इसके लिए चुंबकीय परिरक्षण, समर्पित बिजली आपूर्ति, स्थिर तापमान और कंपन-मुक्त वातावरण की आवश्यकता होती है. यह सब एक अलग और विशेष रूप से निर्मित भवन में ही संभव है. क्या होगा लाभ इमरजेंसी में मरीजों का तत्काल और सटीक निदान संभव होगा. गंभीर मरीजों को बाहर भेजने की मजबूरी खत्म होगी, जिससे समय पर इलाज मिल सकेगा. सरकारी दर पर जांच उपलब्ध होने से गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
