नीलगायों के आतंक से मूंग की फसल पर संकट, रातभर खेतों की रखवाली को मजबूर किसान

नीलगायों के आतंक से मूंग की फसल पर संकट, रातभर खेतों की रखवाली को मजबूर किसान

विजय सिंह, भवनाथपुर भवनाथपुर प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों मूंग की खेती कर रहे किसानों के लिए नीलगायों का आतंक बड़ी समस्या बन गया है. नीलगाय रात और अहले सुबह झुंड बनाकर खेतों में घुस रही हैं व हरी-भरी मूंग की फसल को नुकसान पहुंचा रही हैं. इससे किसानों की मेहनत और लागत पर संकट खड़ा हो गया है. प्रखंड के भवनाथपुर, चपरी, सरैया, फुलवार, कैलान, करमाही समेत कई गांवों में इस बार किसानों ने बड़े पैमाने पर मूंग की खेती की है. फसल में फल लगना शुरू हो गया है और किसानों को अच्छी उपज की उम्मीद थी, लेकिन नीलगायों के लगातार हमलों से किसानों की चिंता बढ़ गयी है. किसानों का कहना है कि मूंग की खेती में बुवाई से लेकर तुड़ाई तक काफी मेहनत करनी पड़ती है. इसके बावजूद नीलगाय फसल को चट कर जा रही हैं. हालात ऐसे हैं कि कई किसानों को पूरी रात खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है. किसान लगातार वन विभाग से फसल सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. फसल बचाने को अपनाया झटका मशीन का सहारा कैलान पंचायत के करमाही और फुलवार व पंडरिया पंचायत के सरैया, धनीमंडरा सहित कई गांवों में किसानों ने फसल बचाने के लिए जुगाड़ तकनीक अपनायी है. किसान खेतों के चारों ओर लकड़ी के डंडे गाड़कर पतले तार लगा रहे हैं, जिन्हें झटका मशीन से जोड़ा जाता है. यह मशीन सौर ऊर्जा और बिजली दोनों से संचालित होती है. तार के संपर्क में आते ही नीलगायों को झटका लगता है और वे खेत से दूर भाग जाती हैं. किसानों का कहना है कि यह तरीका फसल बचाने में कारगर है, लेकिन बिजली के करंट के कारण दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है. कड़ी मेहनत से लगायी जाती है फसल, पकने से पहले ही हो रही नष्ट करमाही के किसान धर्मेन्द्र यादव, रामजन्म यादव और फुलवार के लालनाथ यादव ने बताया कि भीषण गर्मी में कड़ी मेहनत से फसल तैयार की जाती है, लेकिन नीलगाय फसल पकने से पहले ही उसे नष्ट कर देती हैं. इससे किसानों को आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है. उन्होंने वन विभाग से फसल सुरक्षा के लिए ठोस उपाय करने या नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है. इस मुद्दे को लेकर स्थानीय विधायक अनंत प्रताप देव ने पिछले विधानसभा सत्र में भी सवाल उठाया था. उन्होंने सरकार से नीलगायों से फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी नीति बनाने की मांग की थी. हालांकि अब तक न तो वन विभाग और न ही राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस पहल की गयी है, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है.

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Author: Akarsh Aniket

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