प्रतिक्रिया. आम बजट पर कुछ लोगों ने जतायी खुशी, तो नाराज जितेंद्र सिंह, गढ़वा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में आम बजट प्रस्तुत किये जाने के बाद देशभर में इस पर व्यापक चर्चा शुरू हो गयी है. बजट को लेकर जहां एक ओर सरकार समर्थक वर्ग इसे देश को विकसित राष्ट्र की दिशा में ले जाने वाला ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे किसान, गरीब और आम जनता के हितों के विपरीत करार दिया है. इसी कड़ी में प्रभात खबर ने विभिन्न वर्गों के लोगों से प्रतिक्रिया ली, जिसमें बजट को लेकर मिली-जुली राय सामने आयी. कुछ लोगों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, औद्योगिक विकास और तकनीक आधारित पहलों की सराहना की, जबकि कई लोगों ने किसानों की आय, कृषि लागत, न्यूनतम समर्थन मूल्य, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर ठोस प्रावधानों के अभाव को लेकर निराशा जतायी. बजट किसान-विरोधी और जनविरोधी : मिथिलेश ठाकुर झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सह पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने बजट को किसान-विरोधी और जनविरोधी बताया. उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करने वाली केंद्र सरकार ने इस बजट में खेती, किसान, खाद्य सुरक्षा, मजदूर और सिंचाई जैसे मूलभूत विषयों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बातें तो कर रही है, लेकिन युवाओं को एआइ में प्रशिक्षित करने, खेती में इसके प्रभावी उपयोग और किसानों को इससे होने वाले प्रत्यक्ष लाभ को लेकर बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं है. इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार के पास न तो युवाओं के लिए स्पष्ट रोडमैप है और न ही कृषि को आधुनिक बनाने की गंभीर मंशा। मिथिलेश ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बजट में कटौती की गयी है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा. देश को विकसित राष्ट्र बनाने वाला बजट : बबलू पटवा गढ़वा चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष बबलू पटवा ने बजट का समर्थन करते हुए कहा कि यह लोक कल्याणकारी और देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में समर्पित बजट है. उन्होंने कहा कि यह बजट गांव, गरीब, नौजवान, किसान, नारी शक्ति, आदिवासी, दलित, पिछड़े, अत्यंत पिछड़े और मध्यम वर्ग को सशक्त बनाने का मजबूत आधार प्रदान करता है. उन्होंने इसे सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी बजट बताते हुए कहा कि देश के प्रत्येक क्षेत्र और वर्ग के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखकर इसे तैयार किया गया है. दीर्घकालिक विकासोन्मुख बजट : विनोद कमलापुरी व्यवसायी विनोद कमलापुरी ने बजट को दीर्घकालिक विकासोन्मुख बताते हुए कहा कि इसमें मध्यम और छोटे शहरों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी. उन्होंने हर जिले में उच्च शिक्षा के लिए महिला छात्रावास निर्माण, सात नये हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर, तीन एम्स और आयुर्वेदिक कॉलेजों के निर्माण को स्वागतयोग्य कदम बताया. जीवन रक्षक दवाओं को सस्ता करने, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सोलर बैटरी की कीमतों में कमी से आम लोगों को राहत मिलने की बात कही. वहीं शराब और सिगरेट जैसे व्यसन उत्पादों के महंगे होने को सामाजिक दृष्टि से सकारात्मक संकेत बताया. अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती : डॉ मनोज चौबे चिनिया रोड निवासी चिकित्सक डॉ मनोज कुमार चौबे ने बजट को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. उन्होंने किसानों को आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ने की पहल की सराहना की. उन्होंने कैंसर समेत गंभीर बीमारियों की दवाओं को सस्ता करने के निर्णय को जनहितकारी बताते हुए कहा कि इससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी. उन्होंने उम्मीद जतायी कि यह बजट देश की अर्थव्यवस्था को नयी गति देगा. बजट झारखंड की उपेक्षा का प्रतीक : धीरज दुबे झामुमो के केंद्रीय सदस्य सह मीडिया पैनलिस्ट धीरज दुबे ने बजट को झारखंड की जनता की उम्मीदों के साथ अन्याय बताया. उन्होंने कहा कि राज्य के बकाया करोड़ों रुपये, जो झारखंड का संवैधानिक अधिकार हैं, बजट में पूरी तरह नजरअंदाज किये गये हैं. उन्होंने आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग बहुल राज्य होने के बावजूद सामाजिक न्याय से जुड़े प्रावधानों को कमजोर बताया और कहा कि खनिज व वन संपदा से समृद्ध झारखंड को कोई विशेष पैकेज न दिया जाना राज्य के साथ भेदभाव है. आर्थिक स्थिरता व समावेशी विकास पर जोर : दिवाकर सिन्हा चार्टर्ड अकाउंटेंट दिवाकर सिन्हा ने कहा कि बजट में आर्थिक स्थिरता और समावेशी विकास पर ध्यान दिया गया है. छोटे और मध्यम आय वर्ग पर कोई अतिरिक्त कर बोझ नहीं डाला गया है, जो सकारात्मक संकेत है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम वर्ग के लिए कोई बड़ी कर राहत नहीं दी गयी है. अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने के दावे पर उन्होंने कहा कि फेसलेस सिस्टम और नोटिस प्रक्रिया में अभी भी व्यावहारिक सुधार की जरूरत है. बजट किसान, गरीब और मध्यम वर्ग विरोधी : वीरेंद्र साव झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र साव ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट को किसान, गरीब और मध्यम वर्ग विरोधी करार दिया है. उन्होंने कहा कि यह बजट आम जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता और केवल चंद बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाला है. वीरेंद्र साव ने कहा कि बजट में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने को लेकर कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है. बजट पूरी तरह जनविरोधी : संजय तिवारी भारतीय ज्ञान विज्ञान समिति के अध्यक्ष संजय तिवारी ने कहा कि बजट खोखला और निराशाजनक है. कैपेक्स को 12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाना और फिस्कल डेफिसिट को 4.3 प्रतिशत पर लाना दिखावा मात्र है. यह पिछले साल के टैक्स कट्स और जीएसटी राहत के बाद राजस्व संकट का कवर-अप है. कोई नया इनकम टैक्स स्लैब बदलाव नहीं, मध्यम वर्ग को सिर्फ पुरानी 12 लाख तक छूट का दोहराव महंगाई और बेरोजगारी के दौर में यह तमाशा है. इस बार का बजट ऐतिहासिक : उमेश कश्यप भाजपा नेता उमेश कश्यप ने कहा कि इस बार का बजट ऐतिहासिक है. यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं वित्त मंत्री की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि इस बजट से शिक्षा, रेलवे, स्वास्थ्य एवं औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे. बजट का सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा. मोदी सरकार का बजट ऐतिहासिक है : रितेश चौबे भाजपा जिला मिडिया प्रभारी रितेश चौबे ने कहा कि मोदी सरकार का बजट ऐतिहासिक है. बजट से भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर एक कदम और आगे बढ़ा है. मोदी सरकार देश में स्वास्थ्य शिक्षा रोजगार सड़क रेलवे किसान पर खास फोकस कर बजट बनाया है. स्वास्थ्य के क्षेत्र में एम्स अस्पताल कैंसर दवा सहित अन्य गंभीर बिमारियों का दवा बनाने का काम किया जाएगा जो जनहित में सबसे जरूरी कदम है.
आम बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया, समर्थन और विरोध के सुर तेज
प्रतिक्रिया. आम बजट पर कुछ लोगों ने जतायी खुशी, तो नाराज
