चौकीदार को बर्खास्त करने व पीड़ित के परिजनों को मुआवजा दिलाने की मांग प्रतिनिधि, विशुनपुरा (गढ़वा) विशुनपुरा थाना क्षेत्र के अमहर गांव में आठ माह पूर्व हुई मारपीट की एक घटना ने गुरुवार को गंभीर मोड़ ले लिया. इस मारपीट में गंभीर रूप से घायल उपेंद्र चंद्रवंशी (45) की इलाज के दौरान गुरुवार सुबह आठ बजे मौत हो गयी. मौत की खबर मिलत ही आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को रमना–विशुनपुरा मुख्य सड़क पर रखकर जाम कर दिया. ग्रामीणों ने छह घंटे तक सड़क जाम कर डीसी व एसपी को मौके पर बुलाने, चौकीदार को बर्खास्त करने व पीड़ित के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की. इसके बाद अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर मिर्घा के आश्वासन पर ग्रामीण सड़क से हटे. एसडीओ ने कहा कि चौकीदार को पद से बर्खास्त करने के लिए वरीय पदाधिकारी को तुरंत पत्राचार किया जायेगा. सरकार द्वारा मृतक के आश्रितों को दिये जाने वाले सभी लाभ दिलवाने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जायेगी. इसके बाद विशुनपुरा थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. जाम के कारण सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गयी थी, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. जाम को नियंत्रण में रखने के लिए रमना, बरडीहा और नगर उंटारी थाना के प्रभारी सहित अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर तैनात थे. मौके पर ताहिर अंसारी, शंभूराम चंद्रवंशी, धर्मेंद्र सिंह, जितेंद्र दीक्षित, मुखिया ललित नारायण सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे. क्या है मामला मृतक उपेंद्र के परिजनों के अनुसार मारपीट की घटना इस वर्ष होली की रात हुई थी. गांव के ही चौकीदार कन्हाई पासवान, उसकी पत्नी मेत्री देवी, पुत्र रौशन पासवान, छोटू पासवान और पुत्री करिश्मा कुमारी पर उपेंद्र चंद्रवंशी व प्रशांत कुमार को पीटने का आरोप है. इस घटना में उपेंद्र के सिर में गंभीर चोट आयी थी, जिस कारण उसका लगातार इलाज चल रहा था और सर्जरी भी हुई थी. आठ दिन पहले ही उपेंद्र इलाज करवाकर घर लौटा था, लेकिन गुरुवार को उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गयी और उसकी मौत हो गयी. परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है. मृतक के परिजनों के अनुसार, विशुनपुरा थाना में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद प्रशासन की ढिलाई के कारण चौकीदार कन्हाई पासवान को आसानी से बेल मिल गयी और वह वापस ड्यूटी पर भी बहाल हो गया. पीड़ित के परिजनों ने बताया कि आठ माह तक इलाज कराते-कराते उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. पुलिस प्रशासन पर मामले को दबाने का आरोप लगाया है.
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