गढ़वा व्यवहार न्यायालय में लोक अदालत-सह-विधिक शिविर: हाईकोर्ट जज बोले - छोटी बातों को सुलह से खत्म करें

राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझौते से विवादों का निपटारा आसान है. न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने लोगों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक किया.

गढ़वा. सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं होने के कारण कई जरूरतमंद लोग उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं. कई बार योजनाओं की राशि भी वापस चली जाती है. लोगों को अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक होना होगा. छोटे-मोटे विवादों को अदालत में लंबा खींचने के बजाय लोक अदालत में आपसी सुलह और समझौते से समाप्त किया जा सकता है. इससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है और लोगों को त्वरित न्याय मिलता है.

लोक अदालत-सह-मेगा विधिक सशक्तिकरण शिविर

ये बातें झारखंड हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने शनिवार को गढ़वा व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत-सह-मेगा विधिक सशक्तिकरण शिविर में कहीं. उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है. जानकारी के अभाव में योजनाओं का पूरा लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता. उन्होंने लोगों से अपने अधिकारों और योजनाओं की जानकारी लेने तथा पात्रता के अनुसार लाभ प्राप्त करने की अपील की.

ये भी पढ़ें: रमना में बाइक अनियंत्रित होकर पलटी, छत्तीसगढ़ का युवक गंभीर रूप से घायल

न्याय केवल कानूनी न्याय तक सीमित नहीं

न्यायमूर्ति ने कहा कि न्याय केवल कानूनी न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है. लोक अदालत इसी दिशा में प्रभावी माध्यम है. समझौते योग्य मामलों को सुलह के आधार पर समाप्त करने से विवाद खत्म होते हैं और न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है.

ये भी पढ़ें: गढ़वा : चपरी-शिशवा रोड पर टिबरी नाला का छलका बहा, आधा हिस्सा क्षतिग्रस्त

कई तरह के मामलों का निबटारा

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष डालसा मनोज प्रसाद ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलहनीय आपराधिक मामलों के अलावा एनआइ एक्ट की धारा 138, मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, बिजली-पानी, उत्पाद अधिनियम, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, सिविल मामले, बैंक वसूली, वन अधिनियम, बीएसएनएल सहित अन्य सुलहनीय मामलों का निबटारा किया जा सकता है. लंबित मामलों के साथ प्री-लिटिगेशन मामलों का भी निबटारा संभव है. लोक अदालत में कोर्ट फीस नहीं लगती. लंबित मामले के निबटारे पर पहले जमा कोर्ट फीस वापस करने का भी प्रावधान है. लोक अदालत का निर्णय अंतिम होता है और इसके खिलाफ अपील का सामान्य प्रावधान नहीं है.

जानकारी के लिए लगाये गये स्टॉल

मेगा विधिक सशक्तिकरण शिविर में विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी. पात्र लाभुकों को योजनाओं से जोड़ा गया और कई लोगों को मौके पर ही लाभ दिया गया.

विधिक सहायता के मामलों में डालसा महत्वपूर्ण भूमिका

डीसी पशुपतिनाथ मिश्रा ने कहा कि जनसुनवाई में बड़ी संख्या में लोग समस्याएं लेकर पहुंचते हैं और कई समस्याओं का समाधान वहीं किया जाता है. कानूनी अधिकारों और विधिक सहायता के मामलों में डालसा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. एसपी आशुतोष शेखर ने कहा कि लोक अदालत में लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का भी निबटारा संभव है. इससे लोगों का समय और धन बचता है.

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी तरीके से

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी तरीके से लोटा-पानी और गीत के साथ न्यायमूर्ति के स्वागत से हुई. पांच लाभुक महिलाओं ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया. मौके पर जिला जज मनोज प्रसाद, डीसी पशुपतिनाथ मिश्रा, एसपी आशुतोष शेखर सहित न्यायिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >