5 लाख की जमीन, मुआवजा सिर्फ 2 हजार! ग्रामीण बोले- पहले 1.05 लाख का भरोसा, अब विभाग कर रहा मनमानी

मधेया गांव के ग्रामीणों ने भू-अर्जन कार्यालय और सड़क ठेकेदार पर मुआवजा राशि के गलत निर्धारण का आरोप लगाया है. विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के साथ समाहरणालय पहुंचकर ग्रामीणों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा है.

गढ़वा. जिला भू-अर्जन कार्यालय गढ़वा और सड़क निर्माण के ठेकेदार पर मधेया गांव के ग्रामीणों को दिग्भ्रमित कर मुआवजा राशि का गलत निर्धारण करने का आरोप लगाया गया है. इस संबंध में मधेया गांव के दर्जनों रैयतों ने विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के साथ मंगलवार को समाहरणालय पहुंचकर उपायुक्त से मुलाकात की और अपना विरोध दर्ज कराया. इस दौरान उपायुक्त को एक आवेदन भी सौंपा गया.

5 लाख के बाजार मूल्य पर 2 हजार मुआवजे का आरोप

इस मौके पर विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने कहा कि हूर मोड़ से डंडा पथ चौड़ीकरण के तहत मध्या-हूर गांव में जमीन का बाजार मूल्य पांच लाख रुपये प्रति डिसमिल के हिसाब से खरीदी-बेची जा रही है. लेकिन भू-अर्जन विभाग मात्र दो हजार रुपये प्रति डिसमिल दे रहा है.

उन्होंने कहा कि इस मामले में उपायुक्त से सकारात्मक चर्चा हुई है और उपायुक्त ने उन्हें इस मामले में किसी भी तरह की नाइंसाफी नहीं होने देने का वायदा किया है.

श्री तिवारी ने इस मौके पर यह भी कहा कि शहर के विस्तार की वजह से हूर-मध्या गांव में भूमि माफियाओं की नजर लग गयी है. पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर के इशारे पर इस गांव में माफिया ग्रामीणों को डरा-धमकाकर और बरगलाकर जमीन लूट रहे हैं.

1.05 लाख देने का था वायदा, अब 2 हजार की पेशकश

इस मौके पर ग्रामीणों की ओर से उपायुक्त को दिये आवेदन में कहा गया है कि उन्हें भू-अर्जन विभाग की ओर से 1.05 लाख रुपये प्रति डिसमिल की दर से मुआवजा देने का वायदा किया गया था, लेकिन अब मात्र दो हजार रुपये की पेशकश की जा रही है.

शुरुआत में जिला भू-अर्जन कार्यालय गढ़वा एवं रोड के ठेकेदार द्वारा ग्रामीणों को यह भरोसा और आश्वासन दिया गया था कि उन्हें उचित राशि दी जायेगी. साथ ही यह भी कहा गया था कि रोड निर्माण में सहयोग करने पर सरकार द्वारा बाजार मूल्य से चार गुना राशि बढ़ाकर दी जायेगी. लेकिन अब संवेदक एवं विभाग के लोग सभी मुकर गये हैं.

विभाग के कर्मी पर डराने-धमकाने का आरोप

ग्रामीणों ने विभाग के कर्मी प्रकाश पाण्डेय पर डराने और धमकाने का आरोप लगाया है. श्री पाण्डेय की ओर से उन्हें जबरन कम राशि स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जा रहा है और धमकी दी जा रही है कि यदि वे इसे नहीं लेंगे, तो उन पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी और यह राशि भी उन्हें नहीं मिलेगी. ग्रामीणों ने मामले में उचित जांच कराकर न्याय दिलाने की मांग की है.

विधायक के साथ समाहरणालय पहुंचे रैयत

आवेदन देने के दौरान विशाल पाल, लक्ष्मण पाल, रमाकांत पासवान, रामाधार चौबे, उदय दूबे, संजीत चौबे, मनदीप चौबे, रामनारायण चौबे आदि मौजूद थे.

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By पियूष तिवारी

पियूष तिवारी गढ़वा जिले में सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. ढाई दशक से भी अधिक के इस सुदीर्घ अनुभव में उन्होंने खोजी पत्रकारिता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया है. पेचीदा प्रशासनिक मामलों का तथ्यपरक विश्लेषण करना और छिपी हुई खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ सामने लाना उनकी कार्यशैली की मुख्य पहचान है.

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