केतार. प्रखंड क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में एएनएम की पदस्थापना नहीं होने से ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो रही है. एएनएम के अभाव में परती कुश्वानी, बीजडीह, परसोडीह एवं कधवन स्थित चार आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद पड़े हैं.
इससे खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ रहा है. प्रखंड के कुल छह आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में फिलहाल केवल केतार और मुकुंदपुर में ही एएनएम की पदस्थापना है. वहीं चार केंद्रों के बंद रहने से सुदूरवर्ती गांवों के लोगों को सरकार की ओर से निर्धारित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ गांव में ही नहीं मिल पा रहा है.
ग्रामीणों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए करीब 12 किलोमीटर दूर स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल जाना पड़ता है. सबसे अधिक परेशानी सोन तटीय क्षेत्र के ग्रामीणों को उठानी पड़ रही है. कधवन, बीजडीह और परती कुश्वानी क्षेत्र के आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद रहने के कारण बड़ी आबादी स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित है.
इन केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, सामान्य बीमारियों की प्राथमिक चिकित्सा, स्वास्थ्य परामर्श और सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाया जाना है. ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो संचालित है, लेकिन वह भी दोपहर तीन बजे के बाद बंद हो जाता है. ऐसे में गर्भवती महिलाओं को मजबूरी में दूर के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है.
