दो साल से अनुपस्थित शिक्षक को निलंबित करने का निर्देश

दो साल से अनुपस्थित शिक्षक को निलंबित करने का निर्देश

गढ़वा.

पीएम पोषण योजना एवं समग्र शिक्षा अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 का सामाजिक अंकेक्षण किया गया. इसे लेकर जिला स्तरीय जनसुनवाई गुरुवार को गढ़वा के पुराने समाहरणालय के सभाकक्ष में हुई. इसमें विभिन्न विद्यालयों की समस्याओं एवं शिकायतों की सुनवाई की गयी. इस दौरान अनियमितता पाये जाने पर चिनिया उत्क्रमित मध्य विद्यालय बरवाडीह के शिक्षक को निलंबित करने का निर्देश दिया गया. जनसुनवाई में बताया गया कि विद्यालय के शिक्षक लगातार दो साल से अनुपस्थित रह रहे हैं. लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से कोई कारवाई नहीं की जा रही है. समीक्षा बैठक में ज्यूरी के सदस्यों ने शिक्षक अवधेश कुमार यादव को निलंबित करने का निर्णय लिया. इसी तरह भंडरिया प्रखंड के कोरहटी प्राथमिक विद्यालय में फर्जी वाउचर पर राशि निकासी को लेकर नाराजगी जाहिर की गयी तथा इसकी जांच के लिए एक जांच टीम गठित की गयी. जनसुनवाई के दौरान बताया गया कि कोरहटी प्राथमिक विद्यालय में लगातार लकड़ी के चूल्हे पर मध्याह्न भोजन बनाया जा रहा है. पर एलपीजी गैस का फर्जी बिल दिखाकर राशि निकासी की गयी है. इस विद्यालय के दैनिक पंजी में 40 विद्यार्थियों की उपस्थिति दिखायी गयी है, लेकिन भौतिक रूप से 25 छात्र ही विद्यालय में उपस्थित रहते हैं.

बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही : इसी तरह से जनसुनवाई में यह भी पता चला कि गढ़वा प्रखंड के अकतहवा टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय, मेढ़ना में 27 विद्यार्थी नामांकित हैं. प्राचार्य द्वारा बताया गया कि आइडी पासवार्ड नहीं रहने के कारण यहां के विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रहे रहे हैं. इस पर सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग की लापरवाही पर चिंता व्यक्त की गयी तथा अविलंब आईडी-पासवर्ड जारी करते हुए सभी व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया.

कुल 52 में से 25 बच्चों को ही मिली ड्रेस : भवनाथपुर प्रखंड के गरदा उत्क्रमित उच्च विद्यालय में वहां के प्राचार्य का एक इंक्रिमेंट रोकने का निर्देश दिया गया तथा सीआरपी व बीइइओ से स्पष्टीकरण मांगा गया. जनसुनवाई में इस विद्यालय का मामला आया था कि यहां कुल नामांकन 52 विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन मात्र 25 बच्चों को ही ड्रेस उपलब्ध कराया गया है. बैठक में कई अन्य विद्यालयों से संबंधित शिकायतों पर भी जनसुनवाई में चर्चा की गयी.

उपस्थित लोग : मौके पर उपविकास आयुक्त पशुपति नाथ मिश्रा, जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज, जिला परिषद उपाध्यक्ष सत्यनारायण यादव व ज्यूरी मेंबर सह सामाजिक कार्यकर्ता संजय तिवारी मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By SANJAY

SANJAY is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

नगर निकाय चुनाव में नहीं चला विधानसभा का गणितगढ़वा नगर परिषद चुनाव में भाजपा, झामुमो, कांग्रेस व राजद को उम्मीद से कम मिले मत- अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने चौंकाया- पिछले मत प्रतिशत को बरकरार नहीं रख सके बड़े दलपीयूष तिवारी, गढ़वागढ़वा नगर परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद प्रत्याशियों को मिले मतों और उनके जीत-हार के समीकरणों की चर्चा शहर के नुक्कड़ों और चौक-चौराहों पर तेज हो गयी है. बिना किसी दल और बड़े नेताओं के समर्थन के दौलत सोनी की अध्यक्ष पद पर जीत ने सभी को चौंका दिया है. इस चुनाव में झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाजपा जैसे बड़े दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. लेकिन परिणामों ने इन दलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. करीब 15 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इन दलों को जो मत मिले थे, उन्हें वे अपने समर्थित प्रत्याशियों के माध्यम से बरकरार नहीं रख सके. सबसे खराब स्थिति भाजपा की रही है. विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा शहर के 33 बूथों में से 30 बूथों पर पहले स्थान पर रही थी. शहरी क्षेत्र से पार्टी को 15 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे. इसके विपरीत नगर निकाय चुनाव में भाजपा के अध्यक्ष पद की प्रत्याशी कंचन जायसवाल को मात्र 2582 मत मिले. यदि भाजपा के बागी प्रत्याशी अलखनाथ पांडेय को मिले 2701 मत भी जोड़ दिये जाएं, तो कुल आंकड़ा लगभग 5300 तक ही पहुंचता है. यह संख्या विधानसभा चुनाव में मिले मतों की तुलना में काफी कम है.पिछले निकाय चुनाव के मत भी नहीं बचा सकी भाजपावर्ष 2018 के नगर निकाय चुनाव में अलखनाथ पांडेय की पत्नी मीरा पांडेय ने भाजपा के टिकट पर उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था. उन्हें 6899 मत मिले थे. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वाले विनोद जायसवाल (2026 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी कंचन जायसवाल के पति) को 3810 मत प्राप्त हुए थे. वर्तमान चुनाव में ये दोनों ही परिवार अपने पुराने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके. न तो विधानसभा चुनाव में मिले मतों को बरकरार रख पाये और न ही पिछले निकाय चुनाव के आंकड़े तक पहुंच सके.झामुमो और कांग्रेस का गठजोड़ भी नहीं दिला सका जीतगढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो ने संतोष केसरी को अपना समर्थित प्रत्याशी बनाया था. कांग्रेस ने भी उन्हें समर्थन दिया. दो बड़े दलों के समर्थन के बावजूद संतोष केसरी को मात्र 3790 मत प्राप्त हुए. वर्ष 2018 के निकाय चुनाव में महिला आरक्षित सीट होने के कारण संतोष केसरी की पत्नी पिंकी केसरी अध्यक्ष पद की प्रत्याशी थीं. तब उन्हें 6411 मत मिले थे और वे भाजपा प्रत्याशी थीं. उसी चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कमर सफदर को केवल 420 मत प्राप्त हुए थे. दोनों दलों को उम्मीद थी कि संयुक्त रूप से वे करीब सात हजार मत प्राप्त कर संतोष केसरी को जीत दिला देंगे. लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी.54 मतों से हारने वाली अनिता दत्ता को इस बार केवल 215 मतवर्ष 2018 के नगर परिषद चुनाव में झामुमो की प्रत्याशी अनिता दत्ता को 6357 मत मिले थे. वे मात्र 54 मतों के अंतर से पिंकी केसरी से हार गयी थीं. इस बार अनिता दत्ता को किसी दल का समर्थन नहीं मिला और वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं. लेकिन उन्हें केवल 215 मतों से ही संतोष करना पड़ा.राजद भी पिछला प्रदर्शन दोहराने में विफलनगर परिषद चुनाव 2026 में राजद ने विकास माली को समर्थन दिया. विकास माली को 1222 मत प्राप्त हुए. जबकि वर्ष 2018 के चुनाव में राजद समर्थित प्रत्याशी मनिका नारायण को 5117 मत मिले थे. वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए राजद प्रत्याशी मो शमीम को 2018 में 3728 मत प्राप्त हुए थे. कुल मिलाकर नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने दलों की बजाय प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी. बड़े दलों की रणनीति और पुराने मत प्रतिशत इस चुनाव में कारगर साबित नहीं हुए.

जमीन विवाद में हुई थी विक्रेता की हत्या, तीन शूटर गिरफ्तार

नाबालिग से दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में एक सप्ताह बाद भी पुलिस के हाथ खाली

फर्जी दस्तावेज पर बनवाये गये प्रमाण पत्र रद्द

यह भी पढ़ें >