प्रभाष मिश्रा की रिपोर्ट
Garhwa Snake Bite News: गढ़वा जिले में बदलते मौसम के मिजाज ने एक नई और बेहद गंभीर स्वास्थ्य चुनौती खड़ी कर दी है. कभी केवल मानसून और बाढ़ के दिनों में दिखने वाला सर्पदंश का खतरा अब गढ़वा में बारहों महीने बना हुआ है. सरकारी आंकड़ों की मानें तो चालू वर्ष 2026 के शुरुआती पांच महीनों (जनवरी से मई) के भीतर ही जिले में सर्पदंश के कुल 59 आधिकारिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं. यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि अमूमन शांत रहने वाले ठंड और वसंत के महीनों में भी भारी संख्या में सांपों के निकलने और लोगों को डसने की घटनाएं सामने आई हैं.
आखिर क्यों बदला सांपों का ट्रेंड
विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विभाग के जिला महामारी विशेषज्ञ डाक्टर संतोष मिश्रा के अनुसार, पहले सर्पदंश के मामले मुख्य रूप से जुलाई से सितंबर के बीच यानी भारी बारिश के दौरान ही देखे जाते थे, जब पानी भरने के कारण सांप अपने बिलों से बाहर आते थे. लेकिन अब जनवरी की कड़कड़ाती ठंड और फरवरी-मार्च के सुहावने मौसम में भी सांपों का प्रकोप लगातार देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं, जिसमें तापमान में असंतुलन शीतकाल में भी तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण सांप अपनी नींद पूरी नहीं कर पा रहे हैं और असमय बाहर आ रहे हैं. जंगलों और झाड़ियों की अंधाधुंध कटाई के कारण सांप भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में इंसानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं. घरों के आसपास गंदगी और अनाजों के अनुचित भंडारण से चूहों की तादाद बढ़ी है, जो सांपों का मुख्य भोजन हैं.
साल 2026 में सरकारी अस्पतालों में दर्ज सर्पदंश के मामले
जनवरी- 05
फरवरी- 16
मार्च- 20
अप्रैल- 09
मई- 09
कुल मामले- 59
अंधविश्वास की वजह से अस्पताल नहीं आ रहे कई लोग
चिंता की बात यह है कि ये 59 मामले केवल वे हैं जो इलाज के लिए सदर अस्पताल या अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच पाए.धरातल पर वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. जिले के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में आज भी शिक्षा की कमी और गहराते अंधविश्वास के कारण लोग सर्पदंश का शिकार होने पर अस्पताल आने के बजाय स्थानीय ओझा-गुनी, झाड़-फूंक और तांत्रिकों के जाल में फंस जाते हैं. कई बार स्थिति तब बिगड़ती है जब झाड़-फूंक में बहुमूल्य समय बर्बाद हो जाता है और जब मरीज को अस्पताल लाया जाता है, तब तक जहर पूरे शरीर में फैल चुका होता है.
सदर से लेकर सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक एंटी-वेनम पर्याप्त: डीपीएम
स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम गौरव कुमार ने जिलेवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद है. गढ़वा सदर अस्पताल से लेकर सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पर्याप्त मात्रा में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध है. उन्होंने अपील की है कि लोग अंधविश्वास में पड़कर अपनी जान जोखिम में न डालें. सांप काटने पर बिना एक मिनट गंवाए मरीज को नजदीकी सरकारी अस्पताल लाएं, जहां बिल्कुल मुफ्त और सटीक इलाज उपलब्ध है.
सांप काटे तो क्या करें और क्या न करें
क्या करें
- मरीज को शांत रखें और जितना हो सके स्थिर लेटाकर रखें.
- प्रभावित हिस्से से घड़ी, अंगूठी या तंग कपड़े तुरंत हटा दें
- बिना देर किए मरीज को निकटतम सरकारी अस्पताल ले जाएं.
क्या न करें
- काटे गए स्थान पर चीरा न लगाएं और न ही मुंह से जहर चूसें.
- झाड़-फूंक या ओझा-गुनी के चक्कर में कीमती समय बर्बाद न करें.
- मरीज को कोई भी घरेलू जड़ी-बूटी या दवा न खिलाएं.
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