गढ़वा. पलामू प्रमंडल में संगठित अपराध के पुराने नेटवर्क को अब गढ़वा में भी खंगाला जा रहा है. पुलिस ऐसे अपराधियों और संदिग्ध चेहरों की सूची तैयार कर रही है, जिनका पूर्व में किसी संगठित आपराधिक गिरोह से संपर्क रहा है या वर्तमान में गिरोह की गतिविधियों में शामिल होने की आशंका है. जिलों से जुटाए गए आपराधिक आंकड़ों के आधार पर तैयार हो रही इस सूची के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
संलिप्तता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई
यह कवायद पलामू रेंज के डीआईजी कौशल किशोर के निर्देश के बाद तेज हुई है. उन्होंने संगठित अपराध से जुड़े लोगों की पहचान कर उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया है.गढ़वा एसपी आशुतोष शेखर ने बताया कि प्राप्त निर्देश के आलोक में गढ़वा पुलिस इस दिशा में काम कर रही है. पूर्व में या वर्तमान में किसी संगठित गिरोह से संपर्क अथवा उसकी गतिविधियों में शामिल रहने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. जांच में संलिप्तता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
जेल से बाहर निकलने के बाद फिर सक्रिय न हों
पुलिस की रणनीति सिर्फ सक्रिय अपराधियों तक सीमित नहीं है. जेल में बंद संगठित अपराध से जुड़े लोगों की गतिविधियों और आपराधिक इतिहास का भी आकलन किया जा रहा है. ऐसे मामलों में अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों के आधार पर सीसीए की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है.वहीं, जेल से बाहर रह रहे संभावित अपराधियों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी. पुलिस को उनके खिलाफ सीसीए और निगरानी प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है, ताकि पुराने आपराधिक नेटवर्क को दोबारा सक्रिय होने से रोका जा सके. अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर भी विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है.
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संपत्ति का भी होगा आकलन
संगठित अपराध से जुड़े लोगों की सिर्फ आपराधिक गतिविधियां ही नहीं, बल्कि उनकी चल-अचल संपत्ति का भी आकलन किया जाएगा. डीआईजी ने सभी एसपी को ऐसे लोगों की संपत्ति का ब्योरा जुटाने का निर्देश दिया है. बीएनएस के प्रावधानों के तहत, न्यायालय के आदेश के अनुसार आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है.
संगठित आपराधिक गिरोहों का पुराना इतिहास
पलामू प्रमंडल में संगठित आपराधिक गिरोहों का पुराना इतिहास रहा है और इनके नेटवर्क का प्रभाव प्रमंडल के अलग-अलग हिस्सों में देखा जाता रहा है. इसी पृष्ठभूमि में गढ़वा पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि ऐसे गिरोहों से जुड़े अपराधियों का नेटवर्क जिले तक किस हद तक पहुंचा है. पुलिस की मौजूदा कवायद का मकसद किसी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित अपराधियों और उनके नेटवर्क की पहले से पहचान कर उसे कमजोर करना है.
